Friday, 10 August 2018

*प्रेम मिलन*

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/10/2005
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       श्रेष्ठ है जग में ऐसा अनमोल प्रेम मिलन।
       सदियों की ये कारवाँ मिलते है हर जनम।

      जमीं में पलकर सजी तरुणाई ,
      यौवन की चमक उग आयी है।
      माँ पिता भाई बहन स्नेह तले ,
      मुस्कान कली में भर आयी है।

      बंधती जाती है कलाई में रक्षा का बंधन।
      अटूट रिश्ते तो निभाने होते है मन वचन।

      सुमन पराग कण में मंडराते भौंरे ,
      कैसी निखार लाती रुत सुहानी।
      सावन की हरियाली सी सजती ,
      बचपन बीत जब आती है जवानी।

      संजोते छुप - छुपके करते प्रेम मिलन।
      मन में चाहत की दीप जलाते है प्रितम।

      सच्चे प्यार की आह भरते तन पे ,
      तोड़ कर लांघते हर ऊंची दीवार।
      अपने दम की इम्तिहान देकर भी ,
      प्यार झूकता नही झूकते हैं परिवार।

      कोई यहाँ रोता है तो कोई देते हैं जान।
      जीवन की दो पहिये यही होता अंजाम।

             स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार  ( छ. ग.)
               मो. 9165720460