Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/10/2005
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श्रेष्ठ है जग में ऐसा अनमोल प्रेम मिलन।
सदियों की ये कारवाँ मिलते है हर जनम।
जमीं में पलकर सजी तरुणाई ,
यौवन की चमक उग आयी है।
माँ पिता भाई बहन स्नेह तले ,
मुस्कान कली में भर आयी है।
बंधती जाती है कलाई में रक्षा का बंधन।
अटूट रिश्ते तो निभाने होते है मन वचन।
सुमन पराग कण में मंडराते भौंरे ,
कैसी निखार लाती रुत सुहानी।
सावन की हरियाली सी सजती ,
बचपन बीत जब आती है जवानी।
संजोते छुप - छुपके करते प्रेम मिलन।
मन में चाहत की दीप जलाते है प्रितम।
सच्चे प्यार की आह भरते तन पे ,
तोड़ कर लांघते हर ऊंची दीवार।
अपने दम की इम्तिहान देकर भी ,
प्यार झूकता नही झूकते हैं परिवार।
कोई यहाँ रोता है तो कोई देते हैं जान।
जीवन की दो पहिये यही होता अंजाम।
स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
मो. 9165720460
Date - 05/10/2005
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श्रेष्ठ है जग में ऐसा अनमोल प्रेम मिलन।
सदियों की ये कारवाँ मिलते है हर जनम।
जमीं में पलकर सजी तरुणाई ,
यौवन की चमक उग आयी है।
माँ पिता भाई बहन स्नेह तले ,
मुस्कान कली में भर आयी है।
बंधती जाती है कलाई में रक्षा का बंधन।
अटूट रिश्ते तो निभाने होते है मन वचन।
सुमन पराग कण में मंडराते भौंरे ,
कैसी निखार लाती रुत सुहानी।
सावन की हरियाली सी सजती ,
बचपन बीत जब आती है जवानी।
संजोते छुप - छुपके करते प्रेम मिलन।
मन में चाहत की दीप जलाते है प्रितम।
सच्चे प्यार की आह भरते तन पे ,
तोड़ कर लांघते हर ऊंची दीवार।
अपने दम की इम्तिहान देकर भी ,
प्यार झूकता नही झूकते हैं परिवार।
कोई यहाँ रोता है तो कोई देते हैं जान।
जीवन की दो पहिये यही होता अंजाम।
स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
मो. 9165720460