आया कार्तिक मास अब, साफ करें घर द्वार।
रंग बिरंगे लग रहे, आया है त्यौहार।।१।।
गली गली में धूम है, जलती दीप कतार।
सभी मनाये साथ में, दीवाली त्यौहार।।२।।
श्रद्धा सुमन चढ़ा करें, पूजे लक्ष्मी मान।
मेवा घर घर बांटते, नया पहन परिधान।।३।।
लौट आये हैं वन से, अवध राज के राम।
इसी खुशी में बन गये, घर गली चार धाम।।४।।
सुमत सहज ही बांध के, आये जब त्यौहार।
महक दहक बहती हवा, देख खुशी परिवार।।५।।
बैर भाव को छोड़ के, निज मन सुर कर गान।
दया धरम के राह चल, तभी मिलेगा मान।।६।।
स्वरचित - तेरस कैवर्त्य 'आंसू'
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)