अर्जी है जग तारिणी, करो एक उपकार।
देश पड़े मझधार में, कर दो बेड़ा पार।।१।।
चीन देश के रोग से, मचगे हाहाकार।
फैल दौड़ मानव रहे, काल बना है सार।।२।।
जटिल महामारी बड़ा, नही कहीं ईलाज।
बेटा तेरा रटत है, जान बचा मां आज।।३।।
अलग थलग कर चीन को, नर के नाशकदार।
चैत मास में पूजते, दीप जला घर द्वार।।४।।
बाहर जाना बंद है, समय है खतरनाक।
वंदन है मां शारदे, घूमा रक्षा चाक।।५।।
रक्तबीज सम रोग है, कांपे अब संसार।
आदि शक्ति नव रूप में, करो इसे संहार।।६।।
स्वरचित :- तेरस कैवर्त्य 'आंसू'
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो .- 9399169503, 9165720460