Thursday, 2 September 2021

देश प्रेम (देश मया) छत्तीसगढ़ी मनहरण घनाक्षरी

देश हमर सरग, करे ना कभू गरब,
दुनिया बीच अलग, सबले चिन्हारी हे।

जात के नीये सुरता, सुनता के कर बूता,
भुइयाँ के कोरा खूंटा, फूल फुलवारी हे।

आनी बानी मीठ भाखा, गुँथ के अरो के राखा,
सिधवा निचट ताका, नीक नर नारी हे।

संग जीबे मोर गोइया, होके अमर भुइयाँ,
बड़ हे मयारू गिया, दिलवाली कारी हे।

हरियर खेत खार, जोहत नदी के पार,
बोहे आँसू आँखी धार, मया के बीमारी हे।

अंतस म भरे मया, दुखिया के कर छया,
जोरिया के सुध लेया, मोर महतारी हे।

तिरंगा के मान बर, माटी के धियान धर,
बैरी संग लड़ कर, बीर संगवारी हे।

ओ वीर ल जोहार हे, हमर रखवार हे,
काँटा खूँटी का पहार, कुबेरा जगवारी हे।

छोर गुलामी बंधना, लड़े कुसवा संग ना,
खुश हमर अंगना, नाम जयकारी है।

सोन चिरइया बता, माता बेटा के नता,
कोरा म तोर सुता, रानी झलकारी हे।

जन गण मन गान, भारत के पहचान,
तन मन रस खान, भाखा चमत्कारी हे।

नजर लगाबे बैरी, तोर कर देबो गैरी,
पाक तोर राख होही, भारत चिंगारी हे।

।जोहार भारत जोहार छत्तीसगढ़।

रचना :- 
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)