दारू भठ्ठी खोल के, नफा लेत सरकार।
गाँव गली में चोरहा, होवत हे मतवार।।
पथरा ढ़ेला बोह के, जतने रुपिया बाप।
बेटा होगे फेरहा, चुगली फेरत जाप।।
दारू बंदी हो जही, कहे बात हर बार।
राजनीति हे दोगली, मुखिया हे सरदार।।
घर - घर झगरा माच गे, दारू में दिन रात।
कतको अलहन होत हे, पी के दारू मात।।
कोनो ककरो नी सुने, कुकरी दारू पात।
होनी कछु जब हो जही, बइठे ढ़नढ़न गात।।
रचनाकार -
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - सारंगढ़ - बिलाईगढ़ (छ.ग.)