Friday, 27 July 2018

कइसे बदलथे दुनिया

Create - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/03/2010
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कइसे बदलथे दूनिया भारी ग भइया।
नइ मिलय चिन्हारी
आवव भुइयां ल सिरजातेन संगी।
जुर मिल के बचातेन।

उजरथे हरियर जंगल झारी,
दिनो दिन बनथे ऊंची इमारती।
किसम किसम के दवाई दारू,
जरी जामथे रोज बिमारी।
बरखा करे बर नइ माटी झरे बर ss ल ल लss
आवव रुखवा ल लगातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

घाम झोरत हे छइंहा भगावथे,
जुन्ना रिवाज अब नंदावथे।
हाइब्रिड बिजहा उपजे नेता,
सावन भादो घलो सुखावथे।
आघु के संसो गुनके हम तो ss ल ल ल ss
पानी बूँद बूँद सकलातेन संगी।
जुर मिल के बचातेन।

करम लिखव अपने हाथ म,
जिन्गी चक्का झिन ढूले हरास म।
दाई ददा के सेवा जतन कर,
घर म घूमे चारो धाम ल।
आही पीढ़ी का जाने सुधरही ss ल ल ल ss
संस्कारी रद्दा बताथेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

का होगे दुनिया रथिया गुनत,
जनम देवइया कुरिया रोवत।
पाई पाई बर तरसे माई बाप,
बहू बेटा मूंदे आँखी रेंगत।
फाटगे छाती कलपत हे जियरा ss ल ल ल ss
बाप बेटा के मया जोरातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।

ये तन के ठिकाना नइये,
माटी म एक दिन जाना यहीं हे।
मनखे मनखे हन एके बरोबर,
सुख दुख ल बिसराना यहीं हे।
कचरा गरब के सफा जतन के s ल ल ल ss
ये माटी ल स्वर्ग बनातेन संगी
जुर मिल के बचातेन।


      स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला (बिलाईगढ़)
   जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
           मोबाइल- 9165720460



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