Wednesday, 18 September 2019

सरल सुगम है अपनी भाषा

                    ।। चौपाई।।
अति सुन्दर मन लगे सुहानी। बोल लिखे इस लिपि में ज्ञानी।।
बहुत वर्ण स्वर हिन्दी माला। हिन्द देश अरमान निराला।।१।।

सरल सुगम है अपनी भाषा। फिर क्यों अन्य करें अभिलाषा।।
दुल्हन जैसी खूब सजे हैं। अलंकार रस छंद बजे हैं।।२।।

कवि लेखक साहित्य रचाते। मन को खोल विचार दिखाते।।
हिन्दी रचना सुन्दर गाना। गागर में सागर छलकाना।।३।।

भारत ऊंचा नभ संसारी। मानक भाषा लाज हमारी।।
हिन्दी कभी भूल नहि जाना। मुख मंडल में इसे सजाना।।४।।

गजब रंग दुनिया में छाई। मन जीवन में प्रेम जगाई।।
झूमें गाएं सब नर-नारी। मेरी हिन्दी विपदा हारी।।५।।

रचना - तेरस कैवर्त्य 'आंसू '
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. - ९१६५७२०४६०, ९३९९१६९५०३
email:aansukai4545@gmail.com

Thursday, 5 September 2019

चयनित हाइकु

1) वन में ठूंठ~
    कुल्हाड़ी की धार में
    बैठी चिड़िया।
2) झील में चांद
    प्रतीक आकाश की~
    जूगनू तारें।
3) पक्षी का झुंड~
    भूरी जमीन पर
    दाने व जाल।
4) केले के पत्ते
    चार कोने तरफ~
    अंतिम यात्री।
5) बच्चों की टोली
    संकरी द्वार पर~
    चौखाट गिरी।
6) नन्ही मछली
    बगुला की चोंच में~
    आखिरी सांस।
7) घर विरान~
     शाख में बन्दर व
     मधु की छत्ता।
8) प्रेमी-प्रेमिका
    सुनसान गली में~
    ठंड की रात।
9) बिहड़रण्य~
     फांसी पर लटके
     प्रेमी युगल।
10) धुआं आरंभ
       बाड़ा पास भठ्ठी में~
       बिल्ली के बच्चे।
11) पेड़ की छांव
       बीच चौराहे पर~
       लाल सलाख।




 रचना - तेरस कैवर्त्य 'आंसू '
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो.- 9165720460