Saturday, 29 April 2017

*नवां जुग के उदीम(दोहा)*

Created by : Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 16/01/2016
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अइसन जुग आय भइया, काय-काय होवथे।
लइका ह सियान बनके, बाप ल सीखावथे।

दुध दही महुरा बनगे, होगे अमरित दारु।
पी पी के चोर होगे, किंदरत हे लफाड़ु।

ठेला म नइ दिखे पान, कोनो नइ खावथे।
लइका अउ सियान तको, गुटका चबलावथे।

भाटा पताली गोभी, बयलर कस उपजाय।
का होगे साग भाजी, सिरतोन नइ मिठाय।

गाय बइला कम होगे, दौरी डोर नी दिखे।
खेत ट्रेक्टर म जोते, हार्वेस्टर म मिसे।

चिठ्ठी पाती नइ आय, मोबाइल ह छागे।
मिनट म गोठ हो जाथे, तन मन ह हरियागे।

ना गुदुम डफरा गम्मत, डीजे झम नाचथे।
सातुर भिर्री गंवागे, क्रिकेट सब भावथे।

घानी जाता लुकागे, नवां मशीन ह आय।
बफर सिस्टम के पार्टी, ठाढ़े होके खाय।

बाप के जियत म बेटा, मेछा तक ल मुड़ाय।
जोहार पलगी भूलय, नमस्ते मे हियाय।

टूरा मन अलाल होय, मारय लउठी खोज।
टूरी मन बेटा बनय, दइ ददा ल अब पोस।

सिरतोन सत के राज नही, लबारी ल पतियाय।
सुरता म आँसू निकले, जमो चीज नंदाय।

          रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
         मोबाइल - 9165720460

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