Sunday, 2 April 2017

* अब्बड़ घाम ददा *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 01/03/2017, * अब्बड़ घाम ददा *
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अब्बड़ घाम ददा !
पंछा मुड़ म ढ़ाँक ले।
अब्बड़ घाम सगा !
रद्दा थोकिन झाँक ले।

नंगत बेरा ल झिन रेंग ,
      भाजी कस अइला जाबे।
गोंदली धर ले संग म ,
      नइ तो निचट झोला जाबे।
अब्बड़ घाम ददा !
पानी भर डब्बा राख ले।

पानी जुच्छा झिन बोहा ,
      बूंदी - बूंदी सकेल जतन।
जी ल राखे बर पानी पीयाउ ,
      हावय संगी मन हीरा रतन।
अब्बड़ घाम ददा !
गुन ले हाट के आत ले।

चिरइ चिरगुन पियास हावय ,
      छानही ऊपर रख देवा पानी।
पुन के बुता कर मइन्खे ,
      बनव झिन कर आनाकानी ।
अब्बड़ घाम ददा !
कुहकही आत चउमास ले।

दही आमा कुसियार रस ,
      पी - पी के देह ल जुड़ावा।
दारु मंउहा झिन पियव ,
      अउ झिन मुड़ ल मुड़ावा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने लागथे नहात ले।

जादा पानी पी भाजी पाला खा ,
      नान्हे लइका कस रुख ल जगा।
जुढ़हा सुग्घर छइंहा दिही ,
      जम्मो कोती सफ्फा उदिम करा।
अब्बड़ घाम ददा !
बने फरिया के बाछ ले।

गरीब कमीया मन बर ,
      का घाम अउ का छइंहा।
खटे जांगर चलाथ रथे ,
      अपन परिवार ब तुमन सइहा।
अब्बड़ घाम ददा !
पसीना ओगारथे कमात ले।

अब्बड़ घाम ददा !
शुरु हो जाथे पहात ले।


        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      जिला  - बलौदाबाजार (छ.ग.)
       मोबाइल - 9165720460
  email : aansukai4545@gmail.com



   

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