Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 03/01/2016
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मानव स्वयं विनाश को तुले हैं।
जानकर भी अनजान बन भूले हैं।
वनों का हो रहा है दोहन ,
जीवों का हो रहा है पतन ।
हरियाली सिमटने लगी है ,
पर्यावरण बिगड़ने लगा है ।
ध्यान करो ये जीवन का झूले है।
पर्वत नदी झील बदल रही है ,
शनै: शनै: भूमि निगल रही है ।
अत्यंत प्रदूषण अब जकड़ रहा है ,
आलम है विष चहुं पनप रहा है ।
संवारे वादी को फिर क्यूं सुले है ।
प्रसाधन की अब अंबार लगी है ,
कचरो की देखो बाढ़ लगी है ।
प्रतिपल संकट बना हुआ है ,
जल का स्तर में कमी हुई है ।
समाधान के बजाय रंग मे घुले है।
निरंतर रही खिलवाड़ प्रकृति की ,
कांप रही भू रुदन क्षितिज भी ।
संतुलन बिगड़ विकराल हो जाती ,
धन-जन का जो विनाश कर जाती ।
विपदा से जीवन फिर क्यूं रुले है ।
स्वार्थी मनमाने नशा पान करे ,
स्वयं को भव से राम नाम करे ।
अचरज देख मुख फफक पड़े है ,
"आँसू " की बूंदें जब टपक पड़े है ।
मानव स्वयं विनाश को तुले है ,
जानकर भी अनजान बन भूले है ।
निर्मल हो भू-अंबर , वृक्षारोपण लगायें ,
क्षति मुक्त हो जग , सभी प्राणी बचायें।
रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मोबा.- 9165720460, 7770989795
Date :- 03/01/2016
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मानव स्वयं विनाश को तुले हैं।
जानकर भी अनजान बन भूले हैं।
वनों का हो रहा है दोहन ,
जीवों का हो रहा है पतन ।
हरियाली सिमटने लगी है ,
पर्यावरण बिगड़ने लगा है ।
ध्यान करो ये जीवन का झूले है।
पर्वत नदी झील बदल रही है ,
शनै: शनै: भूमि निगल रही है ।
अत्यंत प्रदूषण अब जकड़ रहा है ,
आलम है विष चहुं पनप रहा है ।
संवारे वादी को फिर क्यूं सुले है ।
प्रसाधन की अब अंबार लगी है ,
कचरो की देखो बाढ़ लगी है ।
प्रतिपल संकट बना हुआ है ,
जल का स्तर में कमी हुई है ।
समाधान के बजाय रंग मे घुले है।
निरंतर रही खिलवाड़ प्रकृति की ,
कांप रही भू रुदन क्षितिज भी ।
संतुलन बिगड़ विकराल हो जाती ,
धन-जन का जो विनाश कर जाती ।
विपदा से जीवन फिर क्यूं रुले है ।
स्वार्थी मनमाने नशा पान करे ,
स्वयं को भव से राम नाम करे ।
अचरज देख मुख फफक पड़े है ,
"आँसू " की बूंदें जब टपक पड़े है ।
मानव स्वयं विनाश को तुले है ,
जानकर भी अनजान बन भूले है ।
निर्मल हो भू-अंबर , वृक्षारोपण लगायें ,
क्षति मुक्त हो जग , सभी प्राणी बचायें।
रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मोबा.- 9165720460, 7770989795
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