Wednesday, 29 November 2017

* हाइकु *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 25/05/2016
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(1) कल्पना कर
     भावविभोर शब्द
     सजा सुलेख।

(2) पल कीमती
      ना बितायें फिजूल
      सवाल पर।

(3) रोशन कर
      जल कर दीप सी
      सहज ताप।

(4) जीवन पथ
      चल हमसफर
      कदम मिला।

(5) आदर भाव
      तले कर कमल
      सेवक बन।

(6) प्रकृति बचा
      वृक्ष लगा पहल
      जन सुझाव।

(7) संस्कृति साख
      चल अमल कर
      कर साकार।

(8) अशिक्षा सभी
      समस्या का जड़
      उखाड़ फेंक।

(9) पढ़ो पढ़ाओ
      गढ़ विकास पथ
      भारत देश।

(10) छुपती नही
        झूठ की राज दोष
        खुलती पोल।

(11) जमाना गोल
        तारीफ ईमान की
        सभी सताते।

(12) मन भटके
        नशा पान में चूर
        जान की नाश।

(13) भ्रामक फैला
       अराजकता बाँट
        नेता का चाल।

(14) घमण्ड तोड़
        अंत सब शरीर
        जरुर कल।

(15) पावन भूमि
        है दक्षिण कोशल
        शोभित वादी।

(16) महके फूल
        कुटुम्ब की आँगन
        बहे पवन।

(17) लघु आकार
        दो सीमित संतान
        सुखी आधार।

(18) तुरंत काम
        कल पल न लौट
        है फिर चूक।

(19) हौसला रख
        लक्ष्य पूर्ण सफल
        प्रेम लगन।

(20) मातृ पितृ है
        जो बढ़कर देव
        कोई न दूजा।

(21) जीवन काल
        गृह वस्त्र भोजन
        पुत पालन।

(22) नीर निर्मल
        बचाव जीने योग
        जन जीवन।

(23) गीत संगीत
        सुकून मन भार
        सुर मे ताल।

(24) कर सफाई
        पूर्व मे शौच बाद
        बीमार मुक्त ।

(25) अनेक रुप
        सुता भगिनी माता
        जोरु तमाम।

(26) मेरा वतन
        धन्य उसे सलाम
        वीर शहीद ।

(27) करके योग
        प्रातः संध्या समय
        बनें निरोग।

(28) तन अमूल्य
        मिलकर रहना
        मधुर बोल।

(29) ठंडी बढ़ती
        सन्नाटा रात लेके
        गरम वस्त्र ।

(30) भोर किरण
        सुखदायक रहें
        समस्त प्राणी ।

(31) सफर घड़ी
        जीवन संघर्ष है
        मेला की बेला।




          स्वरचित - तेरस राम कैवर्त्य (आँसू )
                   सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार - भा. पा. (छ. ग.)
                        पिन - 493338
        मो. - 9165720460, 7770989795

     



Monday, 20 November 2017

*जान लेवा होगे*

Created by- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date - 06/07/2017
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आनी बानी के सुख सुविधा ।
परगे करे ले अब्बड़ दुविधा ।
थोरकिन जांगर नइ चलाय।
निचट लघे फटफटी कुदाय।
सोर नीये चलाय के ढ़ेंसा गे ss
बहू बेटी बेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

पान के पतरी सबो नंदागे।
जम्मो जगा प्लास्टिक छागे।
दूध दही घी नइ तो भावय।
कुकरी छेरी चबंदे खावय।
दारु घर म झगरा मचा के ss
अब पंच मेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

बहू बिहाये चिक्कन चान्दो।
सास ससुर नाचय दहिकान्दो।
दाई ददा ल बेटा  गुर्राये।
बहू के तीर म गुड़ लपटाये।
नौ महीना ले पेट सिरजा के ss
महतारी बाप भेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

साग भाजी धान भारी उपजे।
महुरा जहर दवई ल छीचय।
जेखर सेती बड़ बीमारी होथे।
दुख पीरा म बड़ घर भर रोथे।
बाचय जभे ईलाज करा के ss
डाक्टर बाबू देवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

गिन बिन कचरा करव सफाई।
रुख राई झिन तो करव कटाई ।
झिन कर गरब भइया नखरा।
बन जाही हमर बर खतरा।
प्रदूषण ल दूर करा ले ss
ये तो घर लेवा होगे गा।
आज के चलन जान लेवा होगे न।

     स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
        सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
   जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
     मो. - 9165720460
            7770989795

Monday, 6 November 2017

" मोर छत्तीसगढ़ "

Created by :- Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 05/07/2015 *छत्तीसगढ़ी गीत* (पारंपरिक)
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B-मोर छत्तीसगढ़ मइयां।
    परथंव मंय तोरे पइयां।
    बासी के खवइया मइयां हो sssss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। होsss मइयां हो
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G- मोर छत्तीसगढ़ मइयां।
     परथंव मंय तोरे पइयां।
     बासी के खवइया मइयांं होssss
     सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो ss मइयां हो
     हरियर अँचरा नीक लागे न।
B- सुवा पंथी करमा ददरिया, नाचा मन ल भावय ग।
    झांझ मंजीरा घुँघरु मांदर, संगे संग सुनावय ग ।
    नाचे कलगी मुड़ म खोंचे।
    गौरा गौरी मुड़ म बोहे।
    धोती कुरता म रउत नाचय sss
    पंडवानी के गवंइया। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G-मेहनत मंजूरी खेती किसानी, जिन्गी भर ले करना हे।
    पोइल्का लुगरा ककनी बहुंटा, रंगे रंग के गहना हे।
    टोरे नहना चला के जांगर,।
    खांध तुतारी धरके नांगर।
    कुकरा बासत उठ के बिहना sss
    मुखारी के घसइया। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
B-नरवा नदीया डबरी तरिया, निरमल पानी बोहावथे।
    छत्तीसगढ़ के कोरा म, मोंगरा गोंदा महमहावथे।
    राम के शवरीन दाई जिहाँ।
    जगा जगा महामाई इहाँ।
    नदिया तीर तीर डोंगरी तीर तीर sss
    जन्मे नारायण वीर बिलासा। मइयां होss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G- घासी बाबा जन्मे जिहाँ, मोर गिरौदपुरी धाम हे।
    सत के सादा धजा फहरे, बड़े देश के जैत खाम हे।
    यही माटी म कबीर कुटिया।
    अउ बिराजे बाबा बिरितिया।
    दया बरसे देश के भुइयाँ sss
    आँसू पोछत हावे कर्मा। मइयां हो ss
    सुग्घर बोली मीठ लागे ना। हो मइयां हो ss
    हरियर अँचरा नीक लागे न।
G-बरा ठेठरी खुरमी सोहांरी, गुरतुर पाग के अइरसा हे।
    चना मुर्रा लाडु चबनिया, चटनी संग पेज पसिया हे।
    भरे खजाना राज हमर म,।
    डोंगरी झाड़ी फबे डहर म।
    सिरजे हवय हीरा भाखा sss
    ढ़रथे मया अउ पिरीतिया।मइयां होss
    सुग्घर बोली मीठ लागे न। हो मइयां हो ss
    हरियर अंचरा नीक लागे न।
B- मोर छत्तीसगढ़ मइयां.. ....
G- मोर छत्तीसगढ़ मइयां ....

    गीतकार - तेरस राम कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
         मो.- 9165720460
                7770989795
  email : aansukai4545@gmail.com

Wednesday, 1 November 2017

* ददरिया *

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 12/09/2016   * ददरिया *
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लड़की- देख तोला जियरा धक ले करथे ग
           अइसे काये जादू डारे तँय मोहना
           मन बैरी तुही ल खोजथे संगवारी।
           काये होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे तंय ह झुमर जाबे ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आबे न।
लड़का- पैंरी के धुन म तोर होयें बइहा ओ
           पाछू पाछू तोर रेंगेव ओ टूरी
           मया तरी छइंहा ओ संगवारी।
           काये होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे मंय ह झुमर जाहूं ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आहूं न।
लड़की- आरो ल पाके तोर सजथव मंय ह ग
           टिकली फुंदरी संग बेनी गथाके
           देखे बर निकलथव मोर राजा।
           काय होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे तंय ह झुमर जाबे ,
           नरवा के खड़ झूलना झूले बर आबे न।
लड़का- कनिहां के करधन म मोला बांध ले
           सुख दुख के गठरी ल छोर
           सुग्घर बांछ लेबो मोर रानी।
           मया होगे मोला, तोला सुररथव।
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
लड़की- मया होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
लड़का- मया होगे मोला, तोला सुररथव
           दिन रथिया अउ पहतिया संगवारी ss
           कांसी फूलगे हमन झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झूलना म झूले बर आबो न।
दोनो -   कांसी फूलगे हमने झुमर जाबो ,
           नरवा के खड़ झुलना झूले बर आबो न ss -3
         



        गीतकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
            सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
          मोबा. - 9165720460