Saturday, 6 July 2019

बरखा आइस

                             बरखा आइस

बरखा आइस बरखा आइस , सबके अंतस भाइस हे।
नइ दिखे चातर खेत खार , डारा पाना हरियाइस हे।

     किंदर किंदर के आइस बादर , ठरत गर्रा धूंका लाइस हे।
     झिमिर झिमिर पानी गिरय , भूइयां के पियास बूझाइस हे।

बैशाख जेठ के नौतप्पा म , रुख राई मूरझाय रहिस।
पान पतइ झर सूखाय ते , अब डोंगरी झारी हरियाइस।

     कोयली बोलय कुहू - कुहू , बने झक्कर ल बुलावत हे।
     पीहू - पीहू अब पपीहा कहिके , सब्बो ल सुनावत हे।

किसान बैला संग नागर जोतय , डोली खेत टिकरा खार म।
बारी बखरी म साग जगाय , रुख जगाय मेढ़ तरिया पार म।

     अषाढ़ सावन के बरखा करे , नरवा नदियां गहगहाये।
     कुवांर कार्तिक के जुढ़ात लगे , जाड़ छिन छिन समाये।

              रचना - तेरस कैवर्त्य *आंसू*
                 सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)
                     पिन - 493338
        मोबा. - 9165720460, 9399169503
   



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