मापनी - 221 2122 221 2122
वादा सजन मिलन की, अब मात हो रही है।
नित रोज आपसी में, हर बात हो रही है।
दिल दूर हो न डर की, आँसू लगे बहाने।
मन रोग चाहतों की, दिन रात हो रही है।
मिलते रहे सदा ही, छोड़े नही तराने।
बाहें नही छुड़ाओ, बरसात हो रही है।
साथी मिला मूझे तो, खुद रो रहा खुदा भी।
हमराह हौसले में, प्रतिघात हो रही है।
तूफान है हृदय में, जो भी करे जमाने।
मिट जायें प्यार में हम, खट दाँत हो रही है।
आँसू कहे सभी से, जाएँ वही ठिकाने।
जिस वादियाँ सुहानी, दिन रात हो रही है।
रचना :-
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मो. - 9399169503
इमेल - aansukai4545@gmail.com
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