मँय हँव निच्चट लेढ़वा, आके रखिदे लाज।।
आके रखिदे लाज, सुन गौरी के लाला।
दुख पीरा ला टार, गोह राहूँ मँय काला।।
कह आँसू कविराज, मोर खुशी के समय हो।
लेहूँ तोरे नाम, गजानंद तोर जय हो।।
सेवा म तोर धाम हे, लड्डू के हे भोग।
रोज करे सब आरती, गावय झूमय लोग।।
गावय झूमय लोग, कोढ़ीन देथस काया।
अँधरी ल दे आँख, निरधन देथस माया।।
हय गाड़ा जोहार, ये गोहार सुन लेवा।
चारो कोती शोर, रात दिन करबो सेवा।।
देवा हो महादेव के, कारज सुफल बनाय।
चंदन बंदन संग मा, कुमकुम तिलक सजाय।।
कुमकुम तिलक सजाय, मनभावन हे मूरत।
पुज तेरस कविराज, सुग्घर देत हे मेवा।
मँय तो तोरे दास, बिघना हरइया देवा।।
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - सारंगढ - बिलाईगढ़ (छ.ग.)
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