Saturday, 31 December 2016

*" छत्तीसगढ़िहा मन "*

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 30/12/2016
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   हावन बड़ सिधवा , हमन छत्तीसगढ़िहा।
   सपटे कस रथन , सुन के दीदी भइया।
   हावन सबले बढ़िया , हमन छत्तीसगढ़िहा।
   कटोरा धान के , सुग्घर मोर भुइंया।

   बेरा जून्ना बीतगे , नवा बच्छर आगिस।2
   हमर बोली ल दरजा , अभी ल नइ दिस।
   कतेक दिन ल हमन लड़बो इहां।
   छत्तीसगढ़ी भाषा बर मरबो इहां।
   मरबो इहां ssss
   नेता मंतरी बइठे इहां परदेशिया।
   हावन बड़ सिधवा , हमन छत्तीसगढ़िहा।

   नइ छोड़न हमन , मर के छइंहा।2
   हमर माटी के कसम हे मंइया।
   जुरमिल के सुनता मढ़ाबो हमन।
   एक दिन हमर हक लुटबो हमन।
   लुटबो हमन ssss
   हमर गोठ के नइये सुनइया।
   हावन बड़ सिधवा , हमन छत्तीसगढ़िहा।
   कटोरा धान के , सुग्घर मोर भुइंया।

     रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनडुला , (बिलाईगढ़)
         मोबाइल - 9165720460

** मया के छुटई **

Created - Teras Kaiwartya(Aansu)
Date - 18/10/2016 * मया के छुटई *
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    मया म का धराय , मया म पीरा लुकाय हे।
    जेन मया करीस , ओकर मति छरियाय हे।

    सुरता म गती दूनो के , बिगड़े हे संगवारी।
    देखे बर मन तरसे , नइ सुहावय खेती बारी।
    घर के एको मइनसे , मया धुन गम पाय हे।
    न भूख पियास लागे , लकरी सही सुखाय हे।
    
    मया अंधवा होथे , कोनो आंखी म नइ दिखे।
    सुरता दिन भर करके , पाती मया बर लिखे।
    ऐती ओती ल ताकय , पढ़ई ल भूलाय हे।
    देहे बर शोर संदेश , लइका घलो पटाय हे।

    उदिम जादा होगे , रंच रंच गोठ बगरय।
    घर के सियान गुने , बदनामी बर हदरय।
    तरी तरी सगा , टूरी संग बिहा सोरियाय हे।
    फेर समाज के बंधना म , किटकिट ले छंदाय हे।

    खपो दारिन सफ्फा, सगा कहे बने दहेजी दिहा।
    लगन घड़ी नइये तभो , करे चट मंगनी पट बिहा।
    चिंहारी करके मयारु ल, जिन्गी भर रोवाय हे।
    बिछुरे मोर मयारु कइके, 'आँसू ' बड़ बोहाय हे।

    
         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                 सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
                  पिन - 493338
   मोबाइल नं.- 9165720460, 7770989795


Thursday, 1 December 2016

** वर्षा की आगमन **

Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 28/05/2014
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घुमड़ -घुमड़ के आये बादल,
ठंडी हवाएं लायें हैं।
रिमझिम -रिमझिम बारिश कर ,
धरती की प्यास बुझायें हैं।
          सूरज की भीषण तप से ,
          वृक्ष लता जेठ में झुलस रहे थे।
          पतझड़ बन सूख पड़ी ,
          वह जंगल भी अब पनप रहे हैं।

कोयल की कूक सुहानी , 
उस मौसम को बुलाती है।
पपीहा की राग पीउ -पीउ ,
सभी को खूब लुभाती है।
          मां जन्म भूमि की गोद में ,
          गरजे बरसे बूंदें झम - झम से।
          खुशी से चहके प्यारी चिड़िया ,
           मोर नाचे मन छम - छम से।

किसान सारे हल चलाये ,
खेतों और खलिहानों में।
सुन्दर फसल पेड़ लगाये ,
अपने बाड़ी और बगानों में।
          प्रकृति की मोहक मौसम ,
          क्षण - क्षण में बदल आये हैं।
          कहीं तो यह नव जीवन देती,
          कहीं तो कहर बरपाये हैं।

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           गांव - सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
    मोबाइल - 9165720460, 7770989795

" घुटन "

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/10/2001
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जी रहें हैं घुट कर , दर्द अपना दबाये हुए हैं।
हाल सुनाने से पहले , हम खुद सरमाये हुए हैं।।
सहम गया मेरा दिल , नतीजे से वह प्यार के।
अपार टुकड़े हुए है , बेवफ़ाई के तलवार से।।

दो ही कदम चल पाये थे , कि तूफान आ गया।
झपकते ही पलक सामने , नफरमान आ गया।।
गिरा बेवसी मंजिल से , सिर उठाने की काबिल न रहे।
कत्ल हो कातिल हो , मगर ऐसी खपा जालिम न रहे।।


हम ओ बदनसीब है , जो गम के सताये हुए हैं।
दिल देके किसी को हम , खुब पछताये हुए हैं।।
जिंदगी तक रहेगी निशानी , जो धड़कन में बसाये हुए हैं।
यादें तो सदा सताती है , रात-दिन "आँसू" बहाये हुए हैं।।

                रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           ग्राम -  सोनाडुला , पो - परसाडीह
             तहसील + वि. खं. - बिलाईगढ़
         जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)
                       पिन - 493338
       मोबाइल - 9165720460, 7770989795
      Email-aansukai4545@gmail.com
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