Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 28/05/2014
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घुमड़ -घुमड़ के आये बादल,
ठंडी हवाएं लायें हैं।
रिमझिम -रिमझिम बारिश कर ,
धरती की प्यास बुझायें हैं।
सूरज की भीषण तप से ,
वृक्ष लता जेठ में झुलस रहे थे।
पतझड़ बन सूख पड़ी ,
वह जंगल भी अब पनप रहे हैं।
कोयल की कूक सुहानी ,
उस मौसम को बुलाती है।
पपीहा की राग पीउ -पीउ ,
सभी को खूब लुभाती है।
मां जन्म भूमि की गोद में ,
गरजे बरसे बूंदें झम - झम से।
खुशी से चहके प्यारी चिड़िया ,
मोर नाचे मन छम - छम से।
किसान सारे हल चलाये ,
खेतों और खलिहानों में।
सुन्दर फसल पेड़ लगाये ,
अपने बाड़ी और बगानों में।
प्रकृति की मोहक मौसम ,
क्षण - क्षण में बदल आये हैं।
कहीं तो यह नव जीवन देती,
कहीं तो कहर बरपाये हैं।
रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
गांव - सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
Date - 28/05/2014
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घुमड़ -घुमड़ के आये बादल,
ठंडी हवाएं लायें हैं।
रिमझिम -रिमझिम बारिश कर ,
धरती की प्यास बुझायें हैं।
सूरज की भीषण तप से ,
वृक्ष लता जेठ में झुलस रहे थे।
पतझड़ बन सूख पड़ी ,
वह जंगल भी अब पनप रहे हैं।
कोयल की कूक सुहानी ,
उस मौसम को बुलाती है।
पपीहा की राग पीउ -पीउ ,
सभी को खूब लुभाती है।
मां जन्म भूमि की गोद में ,
गरजे बरसे बूंदें झम - झम से।
खुशी से चहके प्यारी चिड़िया ,
मोर नाचे मन छम - छम से।
किसान सारे हल चलाये ,
खेतों और खलिहानों में।
सुन्दर फसल पेड़ लगाये ,
अपने बाड़ी और बगानों में।
प्रकृति की मोहक मौसम ,
क्षण - क्षण में बदल आये हैं।
कहीं तो यह नव जीवन देती,
कहीं तो कहर बरपाये हैं।
रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
गांव - सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
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