Thursday, 1 December 2016

** वर्षा की आगमन **

Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 28/05/2014
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घुमड़ -घुमड़ के आये बादल,
ठंडी हवाएं लायें हैं।
रिमझिम -रिमझिम बारिश कर ,
धरती की प्यास बुझायें हैं।
          सूरज की भीषण तप से ,
          वृक्ष लता जेठ में झुलस रहे थे।
          पतझड़ बन सूख पड़ी ,
          वह जंगल भी अब पनप रहे हैं।

कोयल की कूक सुहानी , 
उस मौसम को बुलाती है।
पपीहा की राग पीउ -पीउ ,
सभी को खूब लुभाती है।
          मां जन्म भूमि की गोद में ,
          गरजे बरसे बूंदें झम - झम से।
          खुशी से चहके प्यारी चिड़िया ,
           मोर नाचे मन छम - छम से।

किसान सारे हल चलाये ,
खेतों और खलिहानों में।
सुन्दर फसल पेड़ लगाये ,
अपने बाड़ी और बगानों में।
          प्रकृति की मोहक मौसम ,
          क्षण - क्षण में बदल आये हैं।
          कहीं तो यह नव जीवन देती,
          कहीं तो कहर बरपाये हैं।

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           गांव - सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
    मोबाइल - 9165720460, 7770989795

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