Thursday, 1 December 2016

" घुटन "

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/10/2001
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जी रहें हैं घुट कर , दर्द अपना दबाये हुए हैं।
हाल सुनाने से पहले , हम खुद सरमाये हुए हैं।।
सहम गया मेरा दिल , नतीजे से वह प्यार के।
अपार टुकड़े हुए है , बेवफ़ाई के तलवार से।।

दो ही कदम चल पाये थे , कि तूफान आ गया।
झपकते ही पलक सामने , नफरमान आ गया।।
गिरा बेवसी मंजिल से , सिर उठाने की काबिल न रहे।
कत्ल हो कातिल हो , मगर ऐसी खपा जालिम न रहे।।


हम ओ बदनसीब है , जो गम के सताये हुए हैं।
दिल देके किसी को हम , खुब पछताये हुए हैं।।
जिंदगी तक रहेगी निशानी , जो धड़कन में बसाये हुए हैं।
यादें तो सदा सताती है , रात-दिन "आँसू" बहाये हुए हैं।।

                रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           ग्राम -  सोनाडुला , पो - परसाडीह
             तहसील + वि. खं. - बिलाईगढ़
         जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)
                       पिन - 493338
       मोबाइल - 9165720460, 7770989795
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