Wednesday, 23 November 2016

** आत्म कविता **

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 08/09/2010 ,   " आत्म कविता "
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किस कदर मैं यहाँ पर आया हूं ,
          न जाने किस कदर से चला जाऊंगा।
बेवसी से बचपन में सोये रहे ,
          माँ की आँचल में जो ना रोये रहे।

     ओ नसीब न हुआ माँ की साया उठ गयी ,
     शीशू अवस्था में माँ की ममता छुट गयी ।

बहता रहा आँख से ओ पानी ,
          छायी थी मेरी जीवन में विरानी।
न हुआ साथ कोई मेरा हमसफर ,
          चलता रहा अकेला भटकते डगर।

     मिला वह हम साथी , थोड़ी पल के लिए।
     वह भी गली चली , अपनी मुँह मोड़ के प्रिये।

मर - मर के दिल से जीता रहा ,
          दर्दे जख्में जिगर से पीता रहा।
छाया था पिता का वो भी गुजर गया ,
          अनमोल सहारा मुझसे बिछड़ गया।

     पर सामने आये , अड़चन से लड़ना पड़ा।
     सोचा इस कदर मुझे , जीने से मरना भला।

यही तो है जिन्दगी मेरी ,
          किस्मत में खीची ये लकीर है।
टूट कर फिर जीना ,
          आत्मा में बनी ये तस्वीर है।

     खुद ही नही मुझमें , कई आत्मा भी तो है आश्रित।
     करना है पालन रीति , रस्में संस्कार और धार्मिक ।

ऐसी भटकती बीता जीवन मेरा ,
          रोता ही रहा और हँसता ही सहा।
खुशी दिये तो मुझे भगवन ,
          पर मेरा पालक खुशी देखा कहाँ ?

              रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                  सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
               जिला - सारंगढ़ - बिलाईगढ़ (छ.ग.)
        मोबाइल - 9165720460 , 7770989795




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