Created by-Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 13/07/1999 "काबर रानी तैं छोड़े"
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बनाये खोंधरा अपन बर मैना ओ,
मया संग ल छोड़ के उड़ाये हे।
निरमोही पियास बूझा के अपन,
मया ल बैरी कस आगी जलाये हे।
तोर सुरता के पीरा म, मय भहर गेहव रे,
काबर रानी तै छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
मया के मोहनी पिया के मोला ,
पाछू लहुट नइ देखेव ओ ।
छाती म तंय बान चलाये ,
दुल्हन बन के रेंगेव ओ।
जीहां-जीहां तंय पांव पखारे,
तीहां-तीहां आँसू ढारे ओ।
कहां उड़ाये मोर सोन चिरइयां,
डोंगरी शहर निहारें ओ।
नइ मिलेय तैं मोर मयारु 2
मय हदर गेहव रे,
काबर रानी तैं छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
हाथ रमजत गुनत-गुनत,
तन ल घुना मोर खागे ओ।
मुंह सुखागे ठाढ़ करियाये,
लकरी सही सुखागे ओ।
करे उपाय मोला हंसाये,
नइ पतझड़ हरियाये ओ।
मन के सपना आधा रहिगे,
मया गिरजा के नइ पायें ओ।
सुरता के ओढ़ना ओढ़े 2
मय तो जर गेहव रे,
काबर रानी तैं छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
Email - aansukai4545@gmail.com
Date - 13/07/1999 "काबर रानी तैं छोड़े"
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बनाये खोंधरा अपन बर मैना ओ,
मया संग ल छोड़ के उड़ाये हे।
निरमोही पियास बूझा के अपन,
मया ल बैरी कस आगी जलाये हे।
तोर सुरता के पीरा म, मय भहर गेहव रे,
काबर रानी तै छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
मया के मोहनी पिया के मोला ,
पाछू लहुट नइ देखेव ओ ।
छाती म तंय बान चलाये ,
दुल्हन बन के रेंगेव ओ।
जीहां-जीहां तंय पांव पखारे,
तीहां-तीहां आँसू ढारे ओ।
कहां उड़ाये मोर सोन चिरइयां,
डोंगरी शहर निहारें ओ।
नइ मिलेय तैं मोर मयारु 2
मय हदर गेहव रे,
काबर रानी तैं छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
हाथ रमजत गुनत-गुनत,
तन ल घुना मोर खागे ओ।
मुंह सुखागे ठाढ़ करियाये,
लकरी सही सुखागे ओ।
करे उपाय मोला हंसाये,
नइ पतझड़ हरियाये ओ।
मन के सपना आधा रहिगे,
मया गिरजा के नइ पायें ओ।
सुरता के ओढ़ना ओढ़े 2
मय तो जर गेहव रे,
काबर रानी तैं छोड़े, मय तो मर गेहव रे।
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
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