Created by -Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 27/10/2011 "मोला अंग-अंग म बसाले"
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मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही मया, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
माथे म टिकली मोला लगाले,
अउ माँग सेंदूर सजाले।
मन म ढांक के मया ल मोरे,
सब्बो दिन बर तय लुकाले।
बना ले न संगी कान के बाली,
रचा ले न बही ओठ म लाली।
बिता ले न ओ संग संगवारी,
बन के जम्मो दिन बर घरवाली।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
नथली नाक म मोला पहिर ले,
ओढ़ के साड़ी पूरा बदन ले।
रखि ले अंचरा म मोला बांध के,
तोर बर हव जावर जोड़ी जान ले।
हाथ के चुरी तोर बन जाथेव,
कनिहा म करधन मय सज जाथेव।
पांव के पैंरी जब बन जाथेव,
छुनूर-छुनूर रेंग के बज जाथेव।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
बना के गर म रखि ले नौलखिया हार,
जनम भर बनथे तोर कड़ा सोन के ढार।
सगरो सुहागिन रइबे मयारु,
जीव के तय मोरे अधार।
ककनी बनुरिया हाथ के आँखी के मय कजरा,
गोड़ म माहुर रचाले संग केश के गजरा ।
पीरा नइ जाने अंतस के मया करे जे लबरा,
आनी-बानी लिगरी लगा करे गोठ के बदरा।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
सज जाथेव बन के गुइया तोर अंगठी के मुंदरी,
सोलह सिंगार सजे रचे हे मोर रानी ओ सुंदरी।
मुड़ कोरा ले बेनी गथाले अउ धरे लाली चुनरी,
तन मन म मोर नाव लिखा ले 'आँसू ' के पुतरी।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भाटापारा (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
Date - 27/10/2011 "मोला अंग-अंग म बसाले"
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मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही मया, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
माथे म टिकली मोला लगाले,
अउ माँग सेंदूर सजाले।
मन म ढांक के मया ल मोरे,
सब्बो दिन बर तय लुकाले।
बना ले न संगी कान के बाली,
रचा ले न बही ओठ म लाली।
बिता ले न ओ संग संगवारी,
बन के जम्मो दिन बर घरवाली।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
नथली नाक म मोला पहिर ले,
ओढ़ के साड़ी पूरा बदन ले।
रखि ले अंचरा म मोला बांध के,
तोर बर हव जावर जोड़ी जान ले।
हाथ के चुरी तोर बन जाथेव,
कनिहा म करधन मय सज जाथेव।
पांव के पैंरी जब बन जाथेव,
छुनूर-छुनूर रेंग के बज जाथेव।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
बना के गर म रखि ले नौलखिया हार,
जनम भर बनथे तोर कड़ा सोन के ढार।
सगरो सुहागिन रइबे मयारु,
जीव के तय मोरे अधार।
ककनी बनुरिया हाथ के आँखी के मय कजरा,
गोड़ म माहुर रचाले संग केश के गजरा ।
पीरा नइ जाने अंतस के मया करे जे लबरा,
आनी-बानी लिगरी लगा करे गोठ के बदरा।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
सज जाथेव बन के गुइया तोर अंगठी के मुंदरी,
सोलह सिंगार सजे रचे हे मोर रानी ओ सुंदरी।
मुड़ कोरा ले बेनी गथाले अउ धरे लाली चुनरी,
तन मन म मोर नाव लिखा ले 'आँसू ' के पुतरी।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार - भाटापारा (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460, 7770989795
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