Tuesday, 22 November 2016

* मोला अंग-अंग म बसाले *

Created by -Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 27/10/2011 "मोला अंग-अंग म बसाले"
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मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही मया, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
    माथे म टिकली मोला लगाले,
    अउ माँग सेंदूर सजाले।
    मन म ढांक के मया ल मोरे,
    सब्बो दिन बर तय लुकाले।
    बना ले न संगी कान के बाली,
    रचा ले न बही ओठ म लाली।
    बिता ले न ओ संग संगवारी,
    बन के जम्मो दिन बर घरवाली।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
    नथली नाक म मोला पहिर ले,
    ओढ़ के साड़ी पूरा बदन ले।
    रखि ले अंचरा म मोला बांध के,
    तोर बर हव जावर जोड़ी जान ले।
    हाथ के चुरी तोर बन जाथेव,
    कनिहा म करधन मय सज जाथेव।
    पांव के पैंरी जब बन जाथेव,
    छुनूर-छुनूर रेंग के बज जाथेव।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
    बना के गर म रखि ले नौलखिया हार,
    जनम भर बनथे तोर कड़ा सोन के ढार।
    सगरो सुहागिन रइबे मयारु,
    जीव के तय मोरे अधार।
    ककनी बनुरिया हाथ के आँखी के मय कजरा,
    गोड़ म माहुर रचाले संग केश के गजरा ।
    पीरा नइ जाने अंतस के मया करे जे लबरा,
    आनी-बानी लिगरी लगा करे गोठ के बदरा।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।
    सज जाथेव बन के गुइया तोर अंगठी के मुंदरी,
    सोलह सिंगार सजे रचे हे मोर रानी ओ सुंदरी।
    मुड़ कोरा ले बेनी गथाले अउ धरे लाली चुनरी,
    तन मन म मोर नाव लिखा ले 'आँसू ' के पुतरी।
मोला अंग-अंग म बसाले, मोला सोलह सिंगार बनाले।
रही-रही सुरता आही रानी, झन आँखी ल आँसू बोहाबे।

               रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                      सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार - भाटापारा (छ.ग.)
        मोबाइल - 9165720460, 7770989795
     


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