Wednesday, 23 November 2016

" मेरी है ये जिन्दगी "

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 31/05/1995,
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जिन्दगी ये जिन्दगी ,
           मेरी है ये जिन्दगी।
रास न आये कभी ,
           मेरी है ये बेकसी।

संवारने लगी थी , दिल को वो कभी ।
रानी थी सपनों की , मेनका और उर्वशी।
कहाँ को ढूंढू उसे , कहाँ से लाऊं उसे।
वो दिल में किसी , और की बसी।
जिन्दगी ये जिन्दगी .............................

मन मन्दिर सुनी पड़ी , रही थी जो मेरी कली।
अपने दुनिया छोड़ के ,जाने लगी दूसरी गली।
'आँसू ' की खून बहा के , धड़कन में कटार चला के।
पर क्यूं प्रियतम , बेवफा दुल्हन बनी।
जिन्दगी ये जिन्दगी ...............................

देखते ही रह गये , हाथ से हाथ मली।
जुदाई के तलवार से , दे दी प्रेम की बली।
घायल दिल टूट गया , चमकता सूरज डूब गया।
उजाले की पथ से , जीवन की रोशनी ढ़ली।

जिन्दगी ये जिन्दगी ,
           मेरी है ये जिन्दगी।
रास न आये कभी ,
           मेरी है बदकिस्मती।

            रचनाकार - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                 सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
       जिला - बलौदाबाजार - भाटापारा (छ.ग.)
      मोबाइल :- 9165720460, 7770989795


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