Saturday, 7 January 2017

** वाह रे आतंकवाद **

Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 18/12/2016
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   देश दुनिया ल तैं बैरी, नंगत काबर डरवाथस।
   चिटकन पीरा नइ लागे, नइ रंच भर पछताथस।
   तहुंच मनखे हावस फेर, मनखे ल काबर लुकाथस।
   काय मिलथे कसई बनके, अउ करले शरम लाज।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

   बंदूक बारुद ल खेल बनाके, जगा जगा बम फटोथस।
   छाती ल कठवा पथरा बनाके, जनऊर बानी गुर्राथस।
   कतेक निकता मनखे के, अब्बड़ लहू बोहाथस।
   निरदोष परिवार के घर, गिराये करलई के गाज।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

   काकर बर तैं बूता करे, का तोर लइका के बन जाही।
   गुनथस तैं जिंदा रबे, एक दिन पंछी तोर उड़ जाही।
   फउजी के चपेटा म परबे, तोर तो कुटी-कुटी हो जाही।
   गती नइ रहे मरे म तोर, खाही कूकुर कौआ तोर लाश।
   वाह रे ! आतंकवाद ।

              रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार-भा.पा.(छ.ग.)
         पिन - 493338,मो.- 9165720460
   

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