Saturday, 7 January 2017

~• कइसन जुग •~

Created by-Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/11/2016
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अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
लइका सियान बनके, बेटा बाप ल सिखावथे।
दुध दही ह महुरा बनगे, अमरीत कस दारु ढ़रकावथे।
पीये बर नइ पावय पइसा, धान कोठी ल टोड़कावथे।
बुधारु ल कहें ठंडा पियादे, एक रुपिया नीये गुनगुनावथे।
दरुहा के संगवारी बर, फटफटी भट्ठी दउड़ावतथे।
अइसन जुग आ गय,आनी-बानी के होवथे।
बच्छर भर नइ होय बिहा, बहू सास ल डरवावथे।
ठेला म नइ दिखे पान, कोनो अब नइ खावथे।
लइका सियान तको, गुटका राजश्री चबलावथे।
पचर-पचर थूक-थूक, सफ्फा जगा ल ललियावथे।
भात साग के सुवाद नी पाय, खात-खात सुसवावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
पढ़े लिखे म चेत नइये, मया के रद्दा जोहथे।
भाटा पताल गोभी करेला, बायलर कस उपजावथे।
पचर्रा होगे साग भाजी, थोरको घलो नइ मिठावथे।
बइला भंइसा होगे कमती, नांगर दंवरी नइ फंदावथे।
हंसिया कुदारी पजावत नइ, ट्रेक्टर हार्वेस्टर म मिसावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
चिठ्ठी पाती के शोर नइये, बड़ मोबाइल म गोठियावथे।
अउ का कहिबे संगी मोर, सबो परिया पोगिरीयावथे।
गाय गरुवा के चरागन बिना, गऊ माता मन बेचावथे।
गुदूम डफरा गम्मत नी दिखे, डीजे धमाल बजात नाचथे।
सातुल इभ्भा भिर्री गंवागे, किरकेट ल जम्मो भावथे।
अइसन जुग आ गय, आनी-बानी के होवथे।
डवकी सियान फेर मरे बिहान, डवका मुड़ धरके रोवथे।
घानी जाँता ढ़ेकी लुकागे, रंगे-रंग के मशीन आवथे।
धान कुटे ल छुटे हालर, ट्रेक्टर घरे पहूँच जावथे।
टूरा लइका अलाल होगे, मारे पीटे बर डंडा खोजथे।
टूरी लइका बेटा बनके, अपन दई ददा ल पोसथे।
सित्तोन नइये सत के राज, झूठ लबारी ल पतियावथे।
सुरता म मोर 'आँसू 'निकले, जम्मो चीज हर नंदावथे।

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           मो. - 9165720460
                  7770989795

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