Tuesday, 10 January 2017

* छत्तीसगढ़ के कोरा *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/01/2017
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मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

भुइंया कोड़ - कोड़ ओल बनाये ,
देह म पसीना चुचवाये ग - २
सेवत - सेवत धान बढ़ाये ,
खटे जांगर के फल पाये ग - २
कतक सुग्घर कुंवर हावय , 
मोर दाई के कोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मगन होके नाचे किसान ,
करे सोनहा दाना के दान ग - २
किंदरे लहके लइका सियान ,
सुवा ददरिया गावे मितान ग - २
नवा धान पूस खुशी मांगे ,
घरो - घरो छेरछेरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मनखे इहां के नीक लागे ,
छत्तीसगढ़ी बड़ मीठ लागे ग - २
अंतस के गोठ नइ लुकाये ,
घेंच मुड़ी अउ नवाये ग - २
छत्तीसगढ़ के खांटी तिहार
हरेली अउ तीजा पोरा।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के।

मोर छत्तीसगढ़ के माटी हावय ,
धान के कटोरा।
अही म देवता धामी बिराजे ,
जिहां होथे मेला।
पांव परव मोर मइंया के , इहां के रहइया के। ४

            रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भा.पा. (छ.ग.)
              मो.- 9165720460

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