अमृत ध्वनि छंद (किसान) छत्तीसगढ़ी
नर - नारी के जात जी , नींदें कोंड़े खार।
भूख घाम सह सह गये , बहरा बामी नार।।
बहरा बामी , नार धान बड़ , सुग्घर हावे।
राख जतन बर , खेत जाय ला , अंतस भावे।।
हमर पुतर ला , पढ़ातेन सुन , मोरे कारी।
कमा धमा के , फसल उगाबो , हम नर - नारी।।
सिरजन :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)