मनुज देह का क्या पता , कब चल यम के धाम।
नीत जगत में नाम हो , करो ध्यान शुभ काम ।।
प्रेम राग के जाल में , बँधे हुए नर - नार।
योग रखो तुम आपसी , जीवन सच्चा सार।।
भाई - भाई सुन सखा , मैं पंछी आजाद।
त्याग करूँ जब देह को , कर लेना बस याद।।
समय चक्र का साथ ही , वंश एक तो खोय।
बाँस खाट में सो गये , फूट - फूट घर रोय।।
तेरस आँसू कह गये , भव सागर से पार।
दया भाव मन में रखो , विनती करे हजार।।
रचना :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
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