Thursday, 17 September 2020

दोहा छंद (हिन्दी भाषा)

 सरल सुगम का राग है , हिन्दी भाषा सार।

अलंकार रस छंद में , मन से खोल विचार।।


अधर कंठ का ताज है , मधुर वचन तुम बोल।

हिन्द बसे हर साँस में , सब से है अनमोल।।


हिन्दी मेरी जान है , देश धरा की आन।

एक बने की डोर है , मधुरस की है खान।।


हिन्दी माला मे रचे , हर स्वर की पहचान।

सुबह शाम हर रात को , गाते हिन्दी गान।।


राज - राज में देश के , आती भाषा काम।

बोलो हिन्दी नमन है , रोशन होगा नाम।।



रचना :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - बलौदाबाजार .(छ ग.)

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