सरल सुगम का राग है , हिन्दी भाषा सार।
अलंकार रस छंद में , मन से खोल विचार।।
अधर कंठ का ताज है , मधुर वचन तुम बोल।
हिन्द बसे हर साँस में , सब से है अनमोल।।
हिन्दी मेरी जान है , देश धरा की आन।
एक बने की डोर है , मधुरस की है खान।।
हिन्दी माला मे रचे , हर स्वर की पहचान।
सुबह शाम हर रात को , गाते हिन्दी गान।।
राज - राज में देश के , आती भाषा काम।
बोलो हिन्दी नमन है , रोशन होगा नाम।।
रचना :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार .(छ ग.)
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