दोहा छंद (बेटी)
सुता तरू की नव कली , करे वरण छठ साँच।
विविध कष्ट में बल लगा , तनिक रोष नहिं आँच।।१।।
दूज वरण बेटा वधू , भोज भरण ससुराल।
वंश दीप की पग बढ़ा , जन्म दिये लघु लाल।।२।।
तीन वरण में राधिका , केशव रतन सुहाग।
चित में रनते देवता , झूमें जीवन बाग।।३।।
चौथ वरण कर तारिणी , ममता आँचल छाँय।
लोरी गाती लाल को , लेके गोद सुलाय।।४।।
पाँच वरण में सासु माँ , सुझ - बुझ के परिवार।
पोता - पोती मन लगा , घर - घर की संसार।।५।।
छठ में राखी बाँधती , बहना मेरा हाथ।
मातु पिता घर छुट गयी , चले पिया के साथ।।६।।
रचना :- तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
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