Sunday, 31 March 2019

सरहद के रखवाले


उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।

धन्य है वह माता पिता तुमको जन्म दिया है।
धन्य है वह पत्नी बेटा तुमको त्याग किया है।
सीमा पर खेले बंदूक खेल होली खून की गुलाले।
आंगन सुना कर .......

सीना पर अपने गोली बारुद ख़ाके वतन आबाद करते हो।
दुश्मन से भी लोहा लेकर अपने देश में सरताज करते हो।
इस मिट्टी मे मिटने चले फर्ज पर मेरे वीर मतवाले।
आंगन सुना कर .......

पुन्य आत्मा मेरे सैनिक बेटे नही भूलते आंचल में सिर झुकाने।
कसम है मां भारती की सरहद में शत्रु को लगाते मौत ठिकाने।
मिट जाते है परिवार छोड़ अमर बनें बड़े दिलवाले।
आंगन सुना कर .......

उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।

रचना - तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मोबाइल - 9165720460




Monday, 25 March 2019

अपनापन (दोहा)

अपनापन (दोहा)
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जन तन में हो यह दया , सब में सम ही भाव।
संकट पर साथी बनें , भर दें उनके घाव।।
रक्षक होता है बड़ा , जीवन दे यमराज।
अपनापन रग रग जगा , गिरे किसी पर गाज।।
जलचर थलचर हर गती , सब में रमते जान।
दर्द मर्म सबको लगे , समझें सभी समान।।
दया रहम करते चले , पथ में भूखे दीन।
दान पुण्य करते रहो , परम धाम में लीन।।
दबे बीज उग नव तरू , चेतन कर संभाल।
अपनापन सुराग जगे , मानव सुन्दर चाल।।
 दौलत रहना कुछ नही , जैसे धनी वजीर।
जीने से मरना भला , जागे नही जमीर।।
मानव दानव मत बनो , रक्षा कर बन श्याम।
चीर हरण में आ बचा , नारी का सम्मान।।

तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक , सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो. - 9165720460




शहादत (कुंडलियां)

शहादत
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लाल जान है उसी का , भारती के जवान।
सदा मां की सेवा में , खूब चढ़ा परवान।।
खूब चढ़ा परवान , स्वयं को भी गये भूल।
आंसू भर के ऑख , शहीद तन गये कबूल।।
बदला हो खून की , नापाक होगी हरकत।
अमर रहें हर वीर , कोटि नमन है शहादत।।

तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक , सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो. - 9165720460

Friday, 22 March 2019

प्रहरी


ढ़ाल बन लडे़ सीमा में , शत्रु से लोहा लेना है।
प्रहरी बैर की नींद उड़ाते, जो मेरे वीर सेना है।

घूस जाओ उनके जमी , चीर उनके सीने को।
राख करो ऐसे मुल्क को , निडर सीख जीने को।

रहम नहीं करना भारत , कटोरे वाले उस पाक को।
तिरंगा लहरा उनके वादी , नाज करो हिन्दुस्तान को।

सबक सीखा कर अभिनंदन , आतंकी पनाह देते है।
सदा झूठ छल कर कायर , सदियों से गुनाह करते है।

ऐसे जुल्म सितम हिंसक को , जड़ धड़ से पतन करो।
सारे जहां से अच्छा भारत , देश वीरता को नमन करो।

रचनाकार - तेरस कैवर्त्य (ऑसू)
शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)



Thursday, 21 March 2019

शहीद जवान

मेरे वतन की सेना को, आंखें यू दिखाना नही।
निकाल देंगे आंखें तेरे, अब हाथ मिलाना नही।

अरे नापाक हैवान, छल से पीछे छुरा घोपते हो।
सामना कर ताकत है तो, क्यों झूठी पापड़ बेलते हो।

हमने चालीस वीर गंवाए, बदले तेरे हजार मारेंगे।
जीत सदा है भारत की, हिम्मत फिर नहीं हारेंगे।

बेहया क्रूर दुर्जन हत्यारे, अपने बाप को धमकाते हो।
हमने तुझे जनम दिया, गीदड़ सी रौब जमाते हो।

बहुत सहा है हमने, हद कर दी आतंक गद्दारों।
बूंद बूंद खून का हिसाब होगा, खाक होगें मक्कारों।

मां मेरी अब विकराल, काली चंडी रूप दिखाएगी।
असुरो का गला काट, बदले की प्यास बुझाएगी।

देश खातिर परिवार छोड़े, फर्ज पर हुए बलिदान।
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, मेरे शहीद वीर जवान।

तेरस कैवर्त्य (आंसू) शिक्षक
सोनाडूला, जिला - बलोदाबाजार (छ ग)