Monday, 25 March 2019

अपनापन (दोहा)

अपनापन (दोहा)
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जन तन में हो यह दया , सब में सम ही भाव।
संकट पर साथी बनें , भर दें उनके घाव।।
रक्षक होता है बड़ा , जीवन दे यमराज।
अपनापन रग रग जगा , गिरे किसी पर गाज।।
जलचर थलचर हर गती , सब में रमते जान।
दर्द मर्म सबको लगे , समझें सभी समान।।
दया रहम करते चले , पथ में भूखे दीन।
दान पुण्य करते रहो , परम धाम में लीन।।
दबे बीज उग नव तरू , चेतन कर संभाल।
अपनापन सुराग जगे , मानव सुन्दर चाल।।
 दौलत रहना कुछ नही , जैसे धनी वजीर।
जीने से मरना भला , जागे नही जमीर।।
मानव दानव मत बनो , रक्षा कर बन श्याम।
चीर हरण में आ बचा , नारी का सम्मान।।

तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक , सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो. - 9165720460




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