उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।
धन्य है वह माता पिता तुमको जन्म दिया है।
धन्य है वह पत्नी बेटा तुमको त्याग किया है।
सीमा पर खेले बंदूक खेल होली खून की गुलाले।
आंगन सुना कर .......
सीना पर अपने गोली बारुद ख़ाके वतन आबाद करते हो।
दुश्मन से भी लोहा लेकर अपने देश में सरताज करते हो।
इस मिट्टी मे मिटने चले फर्ज पर मेरे वीर मतवाले।
आंगन सुना कर .......
पुन्य आत्मा मेरे सैनिक बेटे नही भूलते आंचल में सिर झुकाने।
कसम है मां भारती की सरहद में शत्रु को लगाते मौत ठिकाने।
मिट जाते है परिवार छोड़ अमर बनें बड़े दिलवाले।
आंगन सुना कर .......
उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।
रचना - तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मोबाइल - 9165720460
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