Sunday, 25 September 2016

-: साक्षर बनें :-

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 08/09/2012 , * साक्षर बनें *
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दीदी भईया आओ , पढ़ना लिखना हम सीखें ।
क ख ग घ को हथियार , बनाकर लड़ना सीखें।

उठो जागो बढ़ो आगे , अब ना रहेंगे हम पीछे ।
बढ़ी है नारी शक्ति , अब नहीं रहेंगे हम नीचे ।

फेकें समाज अब तक , जूल्म हम पर कई छीटें ।
साक्षरता की दीप जलाओ , किसी से ना हम झूकें।

जीवन को सुदृढ़ बनाने , गढ़े यह हम तरीके ।
भाग्य जगाने चले अब , बच्चे बूढ़े सभी के ।

नारी पढ़के जीद पे अड़के , कई काम को जीते।
साक्षर भारत बने देश , शिक्षा में जब हम जुटें ।

आह्वान है मेरी बहनो से , अपने भारत के समूचे।
शोषित मुक्त बनेंगे , ना रहें हम खीचे - खीचे ।

दीदी माई आओ , अधिकार अपना हम लूटें ।
अ आ इ ई को ढ़ाल , बनाकर बचना हम सीखें।


     रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                  सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
                मोबाइल - 9165720460

पीरा मया के

Created:- TERAS KAIWARTYA(Aansu)
Date :- 18/07/2005 , * पीरा मया के *
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     ये मन बिरथा,
     तय हर भूला जा ओला रे।
     काबर घेरी - बेरी सुरता ल करस।
     ये करम फूटगे ,
     बाचय नई अब तो चोला रे ।
     भभके आगी अंगरा अंतस म जरस ।

     तोर अंतस म पीरा भरे हे ,
     सुध लगाये सब्बो बेरा म , हो ...
     बैरी बना देहे मोला रे संगी ,
     मुरछ चलय तोर डेरा म ,
     कोन गोहराव काला बतावव - 2
     ए आँसू  के रोना रे ,
     करलइ होवव करय नई कोनो ये तरस।
     ये मन बिरथा ..................

     सकलाये तय पांखी मयारु ,
     मोर मोहनी ये हीरा रतन , हो ...
     छोर के टाटी मन के मोरे ,
     जोरे मया दूसरे के संग ,
     जा निरमोही मया छोर के डोरी -2
     सजे हवय तोर डोला रे ,
     सुग्घर जीबे संगी बने जिंगी ल गढ़त ।
     ये मन बिरथा ...................

        रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                      सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
                    मोबाइल - 9165720460
                                  7770989795

** माँ की ममता **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 10/05/1996,  " Love of Mother "
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बड़ी अनमोल है , दुनिया में जिनकी है माँ ।
बढ़कर न मिलेगी , कहीं दूजा और कहाँ ?
चले गये कहीं टुकड़ा , जिगर का भी जहाँ ।
ब्याकुलता रह जाती , करती ममता की बयाँ ।

      निद्रा न आये न भूख सताये , प्यारी है वह माँ ।
      लौट न आये बेटा , ढूँढने लगी यहाँ - वहाँ ।
      सीने से लगा के , बरसे ममता की घटा से ।
      पिता भले डाटते , मगर सदा रहती बचाते ।

नव माह गर्भ से मुक्त , माँ  गोद में खिलावे ।
तारा है प्यारा आँख का , स्तन रस पिलावे ।
प्रथम गुरु है माता , आदर संस्कार सिखावे ।
चुप कराने गाती लोरी , शीशू को जब सुलावे ।

      पेट भरा न बेटा के , तब मुख में अन्न न जावे ।
      खुद भूखी सोती पर , पुत्र को जलपान करावे ।
      नहीं हैं जननी जिनकी , उन्हें बड़ा ही मलाल है ।
      सारी सुख मिले पर भी , माँ बिना अंधकार है ।

                   स्वरचित :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                               सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
                            जिला :- बलौदाबाजार (छ.ग.)
                                   पिन :- 493338
                           संपर्क सूत्र :- 9165720460
                                             7770989795

Tuesday, 13 September 2016

" माटी के रचना "

Created By : Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 08/12/2015
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कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

झरर-झरर गिरही आँखी ल पानी ,
फाट जाही मोर करेजा के छाती।
थिरक जाही खूनूर-खूनूर ,
बाजे ल गोड़ के साँटी।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

नइ करही धूकूर-धूकूर ,
चलय ल नाक के साँसी।
उड़ जाही मन के परेवना ,
उघार खोंधरा मया के टाटी।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

जाय बर हावय सब्बो ल ,
छोड़ बेटा-बहू घर नाती।
झिन रोबे ये दुलरवा भई ,
आही सुरता मोर दिन राती।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

पाँच  तत्व येमा जाही मिंझर ,
गड़बे भुइयां म अउ जरबे साथी।
रचना माटी के ओढ़ना दसना ,
"आँसू " संग जम्मो हो जाही माटी।

          तेरस कैवर्त्य "आँसू "
        सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        मोबा.- 9165720460




Monday, 12 September 2016

* मोला रंगा ले *

Created by :- Teras Kaiwartya*Aansu*
Date :- 13/10/2014  
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मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना,
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
      माथ के टिकली,चमकत बिजली ।
      मांगे म मोती सजा ले।
      कान म बाली, ओठ के लाली।
      गजरा बेनी म बनाले।
      अचरा म बांध ले झिन भूलाबे।
      लगा ले जम्मो रतन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
      मया के पैंरी, बजाले खुन-खुन।
      हाथ के बन जाथे कंगना।
      सोलह सिंगार तय मोरे अधार।
      आबे रानी मोरे अंगना।
      आनी-बानी दिखा के सपना।
      रचे हावस मोरे मन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
           तेरस कैवर्त्य "आँसू "
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)  

Thursday, 8 September 2016

* आगिस भादो कुवांर महीना *

आगिस भादो के महीना।
गिनावत थे जम्मो के महिमा।
     सावन आइस हरेली लेके जटाधारी।
      आगिस कमरछट कन्हैया के झुलानी।
धो मांज के बइला ल सजाबोन।
पूजा कर सांझी पोरा पटकाबोन।
      भाँटो के देख अंतस अकुलागे।
      तीजा ल बहिनी के लेनहार आगे।
निरजला उपास रहिथे करु भात खाके।
फरहार करे बर घेरी-बेरी बेरा ल ताके।
      हमर लाज के रखइया हे गणराज।
      घर गली चउक म करय बिराज।
कुँवार जोत जले गाबोन नवराति।
माता के भुवन सजे बिहान संझाती।   
      कांसी फूल गे चुंदी सादा लागे।     
      लगतथे अइसन बरखा बूढ़ागे। 
धान के कोरा म पोटरी सिरजागे।
खुशी के "आँसू" आँखी म आगे।


         तेरस कैवर्त्य "आँसू "
        सोनाडुला,(बिलाईगढ़)
       मोबा.- 9165720460
email - aansukai4545@gmail.com