Tuesday, 13 September 2016

" माटी के रचना "

Created By : Teras Kaiwartya(Aansu)
Date : 08/12/2015
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कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

झरर-झरर गिरही आँखी ल पानी ,
फाट जाही मोर करेजा के छाती।
थिरक जाही खूनूर-खूनूर ,
बाजे ल गोड़ के साँटी।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

नइ करही धूकूर-धूकूर ,
चलय ल नाक के साँसी।
उड़ जाही मन के परेवना ,
उघार खोंधरा मया के टाटी।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

जाय बर हावय सब्बो ल ,
छोड़ बेटा-बहू घर नाती।
झिन रोबे ये दुलरवा भई ,
आही सुरता मोर दिन राती।

कोनो ले जाही झिन कोड़ के ,
मोर छत्तीसगढ़ भुइयां के माटी।

पाँच  तत्व येमा जाही मिंझर ,
गड़बे भुइयां म अउ जरबे साथी।
रचना माटी के ओढ़ना दसना ,
"आँसू " संग जम्मो हो जाही माटी।

          तेरस कैवर्त्य "आँसू "
        सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        मोबा.- 9165720460




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