Created by :- Teras Kaiwartya*Aansu*
Date :- 13/10/2014
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मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना,
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
माथ के टिकली,चमकत बिजली ।
मांगे म मोती सजा ले।
कान म बाली, ओठ के लाली।
गजरा बेनी म बनाले।
अचरा म बांध ले झिन भूलाबे।
लगा ले जम्मो रतन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
मया के पैंरी, बजाले खुन-खुन।
हाथ के बन जाथे कंगना।
सोलह सिंगार तय मोरे अधार।
आबे रानी मोरे अंगना।
आनी-बानी दिखा के सपना।
रचे हावस मोरे मन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
तेरस कैवर्त्य "आँसू "
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
Date :- 13/10/2014
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मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना,
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
माथ के टिकली,चमकत बिजली ।
मांगे म मोती सजा ले।
कान म बाली, ओठ के लाली।
गजरा बेनी म बनाले।
अचरा म बांध ले झिन भूलाबे।
लगा ले जम्मो रतन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
मया के पैंरी, बजाले खुन-खुन।
हाथ के बन जाथे कंगना।
सोलह सिंगार तय मोरे अधार।
आबे रानी मोरे अंगना।
आनी-बानी दिखा के सपना।
रचे हावस मोरे मन म ओ।
मया म होगेव तोरे दीवाना।
बसा ले न अंग-अंग म ओ।
मोला रंगा ले रंग म ओ।
मोला रंगा ले संग म ओ।
तेरस कैवर्त्य "आँसू "
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
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