Tuesday, 25 September 2018

* पिरामिड विधा *

Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 02/03/2016

     हे
     भोले
     भंडारी
     सावन में
     जल की धारा
     काँवर ले कांधे
     संतों खूब चढ़ाये।

     हे
     देवा
     गणेश
     आये थोड़े
     दिन के भेंट
     रूला कर गये
     हमें अपने धाम।

     माँ
     काली
     आयेगी
     संहारने
     नव रुप में
     असूर मिटाने
     शेर पर सवार।

     माँ
     तेरी
     शरण
     ले लो मुझे
     सुख की खान
     आँसू छलकते
     बसी मन मन्दिर।

     हे
     राम
     लंका में
     दशहरा
     अहंकारता
     रूपी बैर नाश
     ज्ञान उजाला लाये।

     ये
     दीप
     जलाने
     वनवासी
     लौटे अवध
     जगमग जले
     भारत में दीवाली।

        तेरस कैवर्त्य (आँसू)
      सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
       कवि, गीतकार, गायक

* कदम से कदम मिलाते चलें *

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
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    कदम से कदम मिलाते चले,
    प्रीत की रीत हम सजाते चले।
    अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे,
    साथ साथ गले लगाते चले।

    नारी लक्ष्मी काली बनकर, गद्दारों से टूट पड़ेंगे।
    चन्द्रशेखर भगत बनकर, भाईयों भीड़ पड़ेंगे।
    गंगा यमुना कावेरी सतलज, जल निर्म ल बहायेंगे।
    चंपा चमेली गुलाब केवड़ा, सुगंध फूल खिलायेंगे।

    डगर की काँटे हटाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

    पीपल नीम बरगद की, शीतल छांया की धरती है।
    कोयल मोर पपीहा की, मधुर तान भी निकलती है।
    सावन भादो सी हरियाली, दृश्य नयन रखें कायम।
    मथुरा गोकुल वृन्दावन, अयोध्या बसे नगरी पावन।

    जन धर्म कर्म को बचाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

    गीता रामायण महाभारत, नीति धर्म की ग्रंथ यहाँ।
    बाइबिल कुरान ग्रंथ साहिबा, भाई चारे का पंथ यहाँ।
    संस्कृति सभ्यता वेशभूषा, कितनी गजब निराली है।
    पर्व भरा राष्ट्रीयता की, दशहरा होली और दीवाली है।

    सत्य की जोत जलाते चलें।
    कदम से कदम मिलाते चलें।

     कदम से कदम मिलाते चलें।
     प्रीत की रीत हम बनाते चलें।
     अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे।
     साथ साथ गले लगाते चलें।

                रचना- तेरस कैवर्त्य (आँसू)
                   सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
               जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)


Sunday, 23 September 2018

* भारत का लाज बन जायें*

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
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      भारत का लाज बन जायें,
      मुल्क की नाज बन जायें।

      प्रण करें करबध्द चित,
            नित प्रतिदिन ही नमन।
      सदैव ही मेरे वतन का,
            इस धरा पर लूँ जनम।

       प्रेम की राग बन जायें,
       मुल्क की नाज बन जायें।

       रक्षक बनें तत्पर भीड़ पड़े,
            शत्रु के आगे बढ़े कदम।
      आँच ना आये दामन पर,
            लड़ कर करें उनका पतन।

      आँधी और तूफान बन जायें,
      मुल्क की नाज बन जायें।

      एकता की बल मिसाल दें,
            ना टिकेंगे उनके क्रूर दमन।
      भय से जीने से बेहतर है,
            शहीदी की ओढ़ लें कफ़न।

      इंकलाब जाबांज बन जायें,
      मुल्क की आवाज बन जाये।

      ना उजड़े मोहक दृश्य जमीं,
            अपने मातृ है अनमोल रतन।
      यह धूल माथे तिलक सजे,
            प्राणों से हम करें जतन।

      तलवार और ढ़ाल बन जायें,
      मुल्क की हमराज़ बन जायें।

      झूकना हमें ना मंजूर है,
            भले कफन में जायें दफन।
      होंगे कामयाबी मेरे सैकड़ों वीर,
            क्योंकि है यह मेरा वतन।

      गौरव की ताज बन जायें।
      मुल्क की नाज बन जायें।


                रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                        सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
                 जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
                        पिन - 4 9 3 3 3 8
                मोबाइल - 9 1 6 5 7 2 0 4 6 0
          email; aansukai4545@gmail.com
 
 

   

Monday, 10 September 2018

~~ मेरी कल्पना ~~

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 05/06/1995       * कल्पना *
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     आप अत्यंत आकर्षक हो।
     आप में आकर्षण है।
     आप से आकर्षित हूँ।
     आसमान की घटा है ,
     तेरी रेशमी जुल्फें।
     धरती की छटा है ,
     तेरी मिलकती पलकें।
     हरी मदमाती यौवन से ,
     ओस की कण भी छलकें।
     आँखें है झील सी तेरी ,
     भौंहे जो लकीर की घेरी।
     मुख मंडल की कोमलता ,
     होंठ गुलाब की फूल है।
     मुस्कान उसकी पंखुड़ी , निगाहें बड़ी सुकून है।
     सुरत तेरी चाँद , बिंदिया सूरज की लाली है।
     साँसें सुहावनी खुश्बू से भरी पुरवाई है ,
     गर्दन सुराहीदार तेरी , बांहें सजीली और उत्तेजक है।
     लचकती पतली कमर, बुलबुल की चंचल चाल है।
     दो गोल गोरी कलाइयां , धड़कन को छुने लगी है।
     सुडौल जंघा आग सी , दहकती चमकती अंगारे है।
     रोम तेरी उगे सावन की , महीन हरियाली दुब है।
     गदराई वक्ष उभे संतरे , सोने पे सुहागा है।
     पायल की झंकार तेरी , कुदरत को भ्रमित कर दी।
     तुम्हें बनाने वाले ने, तरासी होगी बड़ी फुरसत से !
     परी मेनका और उर्वशी को भी , मात कर दी।
     वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका....

        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)

** आँखें **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 03/02/2002     (Aankhen)
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      अनुपम उपहार है आँखें।
      औरों से प्यार में है आँखें।
      शरीर का श्रृंगार है आँखें।
      जग अंधकार है बिना आँखें।
      जीवन बेकार है बिना आँखें।
      मन की राहगीर है आँखें।
      निगाह सी तीर है आँखें।
      किस्मत की लकीर है आँखें।
      सारी अंग की वजीर है आँखें।
      देखने में बड़ी गंभीर है आँखे।
      अमूल्य नाजुक अंग है आँखें।
      कैसी बनावट ताजुब है आँखें ?

           रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
               सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
           जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)

Sunday, 2 September 2018

** प्यारी बहना **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 19/01/2000 (Lovely Sister) रक्षाबंधन पर्व पर विशेष
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आओ मेरी प्यारी बहना।
कदम चुमे राखी की बंधना।

यादें तेरी बचपन की,
हमको कितना रुलायेंगी।
रुक जायेंगी दिल की,
धड़कन जब तु डोली से जायेगी।

रीति है दुनिया की प्यारी  ओ बहना।
रोना  नही  यूं ही हंसना बहना।
जाओ मेरी  प्यारी  बहना।
भइया को याद तुम करना।

खाली पड़ी माँ की आँचल,
छूटा है भइया का प्यार।
दूर खड़ी तेरी संग सहेली,
छोड़ दी बाबूल का द्वार।
स्वर्ग है तेरी  ससुराल ओ बहना।
सुख दुख सहते रहना बहना।
आओ मेरी प्यारी बहना।
राखी में भइया की अंगना।

ये घर छूटा शादी से तेरी,
पराये की तुम अरमान हो,
आयेगी मेरी इस दहलीज,
बनके तुम जब मेहमान हो।
हर खुशी तेरी शौहर है बहना।
यहीं पर जीना मरना बहना।
जाओ मेरी प्यारी बहना।
मइंया को याद तुम करना।


रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
  सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. - 9165720460
email - aansukai4545@gmail.com