Created by : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 02/03/2016
हे
भोले
भंडारी
सावन में
जल की धारा
काँवर ले कांधे
संतों खूब चढ़ाये।
हे
देवा
गणेश
आये थोड़े
दिन के भेंट
रूला कर गये
हमें अपने धाम।
माँ
काली
आयेगी
संहारने
नव रुप में
असूर मिटाने
शेर पर सवार।
माँ
तेरी
शरण
ले लो मुझे
सुख की खान
आँसू छलकते
बसी मन मन्दिर।
हे
राम
लंका में
दशहरा
अहंकारता
रूपी बैर नाश
ज्ञान उजाला लाये।
ये
दीप
जलाने
वनवासी
लौटे अवध
जगमग जले
भारत में दीवाली।
तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
कवि, गीतकार, गायक
Date : 02/03/2016
हे
भोले
भंडारी
सावन में
जल की धारा
काँवर ले कांधे
संतों खूब चढ़ाये।
हे
देवा
गणेश
आये थोड़े
दिन के भेंट
रूला कर गये
हमें अपने धाम।
माँ
काली
आयेगी
संहारने
नव रुप में
असूर मिटाने
शेर पर सवार।
माँ
तेरी
शरण
ले लो मुझे
सुख की खान
आँसू छलकते
बसी मन मन्दिर।
हे
राम
लंका में
दशहरा
अहंकारता
रूपी बैर नाश
ज्ञान उजाला लाये।
ये
दीप
जलाने
वनवासी
लौटे अवध
जगमग जले
भारत में दीवाली।
तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
कवि, गीतकार, गायक