Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
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कदम से कदम मिलाते चले,
प्रीत की रीत हम सजाते चले।
अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे,
साथ साथ गले लगाते चले।
नारी लक्ष्मी काली बनकर, गद्दारों से टूट पड़ेंगे।
चन्द्रशेखर भगत बनकर, भाईयों भीड़ पड़ेंगे।
गंगा यमुना कावेरी सतलज, जल निर्म ल बहायेंगे।
चंपा चमेली गुलाब केवड़ा, सुगंध फूल खिलायेंगे।
डगर की काँटे हटाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
पीपल नीम बरगद की, शीतल छांया की धरती है।
कोयल मोर पपीहा की, मधुर तान भी निकलती है।
सावन भादो सी हरियाली, दृश्य नयन रखें कायम।
मथुरा गोकुल वृन्दावन, अयोध्या बसे नगरी पावन।
जन धर्म कर्म को बचाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
गीता रामायण महाभारत, नीति धर्म की ग्रंथ यहाँ।
बाइबिल कुरान ग्रंथ साहिबा, भाई चारे का पंथ यहाँ।
संस्कृति सभ्यता वेशभूषा, कितनी गजब निराली है।
पर्व भरा राष्ट्रीयता की, दशहरा होली और दीवाली है।
सत्य की जोत जलाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
प्रीत की रीत हम बनाते चलें।
अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे।
साथ साथ गले लगाते चलें।
रचना- तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
Date : 14/03/2009
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कदम से कदम मिलाते चले,
प्रीत की रीत हम सजाते चले।
अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे,
साथ साथ गले लगाते चले।
नारी लक्ष्मी काली बनकर, गद्दारों से टूट पड़ेंगे।
चन्द्रशेखर भगत बनकर, भाईयों भीड़ पड़ेंगे।
गंगा यमुना कावेरी सतलज, जल निर्म ल बहायेंगे।
चंपा चमेली गुलाब केवड़ा, सुगंध फूल खिलायेंगे।
डगर की काँटे हटाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
पीपल नीम बरगद की, शीतल छांया की धरती है।
कोयल मोर पपीहा की, मधुर तान भी निकलती है।
सावन भादो सी हरियाली, दृश्य नयन रखें कायम।
मथुरा गोकुल वृन्दावन, अयोध्या बसे नगरी पावन।
जन धर्म कर्म को बचाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
गीता रामायण महाभारत, नीति धर्म की ग्रंथ यहाँ।
बाइबिल कुरान ग्रंथ साहिबा, भाई चारे का पंथ यहाँ।
संस्कृति सभ्यता वेशभूषा, कितनी गजब निराली है।
पर्व भरा राष्ट्रीयता की, दशहरा होली और दीवाली है।
सत्य की जोत जलाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
कदम से कदम मिलाते चलें।
प्रीत की रीत हम बनाते चलें।
अब ना ही थकेंगे ना ही रुकेंगे।
साथ साथ गले लगाते चलें।
रचना- तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
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