Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 05/06/1995 * कल्पना *
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आप अत्यंत आकर्षक हो।
आप में आकर्षण है।
आप से आकर्षित हूँ।
आसमान की घटा है ,
तेरी रेशमी जुल्फें।
धरती की छटा है ,
तेरी मिलकती पलकें।
हरी मदमाती यौवन से ,
ओस की कण भी छलकें।
आँखें है झील सी तेरी ,
भौंहे जो लकीर की घेरी।
मुख मंडल की कोमलता ,
होंठ गुलाब की फूल है।
मुस्कान उसकी पंखुड़ी , निगाहें बड़ी सुकून है।
सुरत तेरी चाँद , बिंदिया सूरज की लाली है।
साँसें सुहावनी खुश्बू से भरी पुरवाई है ,
गर्दन सुराहीदार तेरी , बांहें सजीली और उत्तेजक है।
लचकती पतली कमर, बुलबुल की चंचल चाल है।
दो गोल गोरी कलाइयां , धड़कन को छुने लगी है।
सुडौल जंघा आग सी , दहकती चमकती अंगारे है।
रोम तेरी उगे सावन की , महीन हरियाली दुब है।
गदराई वक्ष उभे संतरे , सोने पे सुहागा है।
पायल की झंकार तेरी , कुदरत को भ्रमित कर दी।
तुम्हें बनाने वाले ने, तरासी होगी बड़ी फुरसत से !
परी मेनका और उर्वशी को भी , मात कर दी।
वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका....
रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
Date : 05/06/1995 * कल्पना *
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आप अत्यंत आकर्षक हो।
आप में आकर्षण है।
आप से आकर्षित हूँ।
आसमान की घटा है ,
तेरी रेशमी जुल्फें।
धरती की छटा है ,
तेरी मिलकती पलकें।
हरी मदमाती यौवन से ,
ओस की कण भी छलकें।
आँखें है झील सी तेरी ,
भौंहे जो लकीर की घेरी।
मुख मंडल की कोमलता ,
होंठ गुलाब की फूल है।
मुस्कान उसकी पंखुड़ी , निगाहें बड़ी सुकून है।
सुरत तेरी चाँद , बिंदिया सूरज की लाली है।
साँसें सुहावनी खुश्बू से भरी पुरवाई है ,
गर्दन सुराहीदार तेरी , बांहें सजीली और उत्तेजक है।
लचकती पतली कमर, बुलबुल की चंचल चाल है।
दो गोल गोरी कलाइयां , धड़कन को छुने लगी है।
सुडौल जंघा आग सी , दहकती चमकती अंगारे है।
रोम तेरी उगे सावन की , महीन हरियाली दुब है।
गदराई वक्ष उभे संतरे , सोने पे सुहागा है।
पायल की झंकार तेरी , कुदरत को भ्रमित कर दी।
तुम्हें बनाने वाले ने, तरासी होगी बड़ी फुरसत से !
परी मेनका और उर्वशी को भी , मात कर दी।
वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका....
रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
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