Monday, 10 September 2018

~~ मेरी कल्पना ~~

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 05/06/1995       * कल्पना *
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     आप अत्यंत आकर्षक हो।
     आप में आकर्षण है।
     आप से आकर्षित हूँ।
     आसमान की घटा है ,
     तेरी रेशमी जुल्फें।
     धरती की छटा है ,
     तेरी मिलकती पलकें।
     हरी मदमाती यौवन से ,
     ओस की कण भी छलकें।
     आँखें है झील सी तेरी ,
     भौंहे जो लकीर की घेरी।
     मुख मंडल की कोमलता ,
     होंठ गुलाब की फूल है।
     मुस्कान उसकी पंखुड़ी , निगाहें बड़ी सुकून है।
     सुरत तेरी चाँद , बिंदिया सूरज की लाली है।
     साँसें सुहावनी खुश्बू से भरी पुरवाई है ,
     गर्दन सुराहीदार तेरी , बांहें सजीली और उत्तेजक है।
     लचकती पतली कमर, बुलबुल की चंचल चाल है।
     दो गोल गोरी कलाइयां , धड़कन को छुने लगी है।
     सुडौल जंघा आग सी , दहकती चमकती अंगारे है।
     रोम तेरी उगे सावन की , महीन हरियाली दुब है।
     गदराई वक्ष उभे संतरे , सोने पे सुहागा है।
     पायल की झंकार तेरी , कुदरत को भ्रमित कर दी।
     तुम्हें बनाने वाले ने, तरासी होगी बड़ी फुरसत से !
     परी मेनका और उर्वशी को भी , मात कर दी।
     वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका....

        रचना :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)

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