Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/03/2009
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
भारत का लाज बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
प्रण करें करबध्द चित,
नित प्रतिदिन ही नमन।
सदैव ही मेरे वतन का,
इस धरा पर लूँ जनम।
प्रेम की राग बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
रक्षक बनें तत्पर भीड़ पड़े,
शत्रु के आगे बढ़े कदम।
आँच ना आये दामन पर,
लड़ कर करें उनका पतन।
आँधी और तूफान बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
एकता की बल मिसाल दें,
ना टिकेंगे उनके क्रूर दमन।
भय से जीने से बेहतर है,
शहीदी की ओढ़ लें कफ़न।
इंकलाब जाबांज बन जायें,
मुल्क की आवाज बन जाये।
ना उजड़े मोहक दृश्य जमीं,
अपने मातृ है अनमोल रतन।
यह धूल माथे तिलक सजे,
प्राणों से हम करें जतन।
तलवार और ढ़ाल बन जायें,
मुल्क की हमराज़ बन जायें।
झूकना हमें ना मंजूर है,
भले कफन में जायें दफन।
होंगे कामयाबी मेरे सैकड़ों वीर,
क्योंकि है यह मेरा वतन।
गौरव की ताज बन जायें।
मुल्क की नाज बन जायें।
रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
पिन - 4 9 3 3 3 8
मोबाइल - 9 1 6 5 7 2 0 4 6 0
email; aansukai4545@gmail.com
Date : 14/03/2009
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
भारत का लाज बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
प्रण करें करबध्द चित,
नित प्रतिदिन ही नमन।
सदैव ही मेरे वतन का,
इस धरा पर लूँ जनम।
प्रेम की राग बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
रक्षक बनें तत्पर भीड़ पड़े,
शत्रु के आगे बढ़े कदम।
आँच ना आये दामन पर,
लड़ कर करें उनका पतन।
आँधी और तूफान बन जायें,
मुल्क की नाज बन जायें।
एकता की बल मिसाल दें,
ना टिकेंगे उनके क्रूर दमन।
भय से जीने से बेहतर है,
शहीदी की ओढ़ लें कफ़न।
इंकलाब जाबांज बन जायें,
मुल्क की आवाज बन जाये।
ना उजड़े मोहक दृश्य जमीं,
अपने मातृ है अनमोल रतन।
यह धूल माथे तिलक सजे,
प्राणों से हम करें जतन।
तलवार और ढ़ाल बन जायें,
मुल्क की हमराज़ बन जायें।
झूकना हमें ना मंजूर है,
भले कफन में जायें दफन।
होंगे कामयाबी मेरे सैकड़ों वीर,
क्योंकि है यह मेरा वतन।
गौरव की ताज बन जायें।
मुल्क की नाज बन जायें।
रचनाकार :- तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
पिन - 4 9 3 3 3 8
मोबाइल - 9 1 6 5 7 2 0 4 6 0
email; aansukai4545@gmail.com
No comments:
Post a Comment