Thursday, 4 October 2018

** तेरस के दोहे **

Created by :- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 12/01/2013
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(1) निर्मल पावन जल धरा, जीवन का आधार ।
      पवन बहे नभ वन चमन, स्वप्न करो साकार।।

(2) फूँक - फूँककर पग रखें, काँटे बिखरे राह।
      इधर - उधर ना ताकना, काबू रखो निगाह।।

(3) व्यर्थ समय ना टालना, पल - पल है अनमोल।
      क्षण - क्षण तू चलता रहे, कदम - कदम को तोल।।

(4) खग कब ठग उड़ जात है, काया माया छोड़।
      दम्भ भाव को त्याग के, मधुर मिलन तो जोड़।।

(5) मादक बेहद विष घना, लत मे जन है आज।
      पतन राह से तन जला, गृह पट दुख गिर गाज।।

(6) वर्षा दिन - दिन घट रही, नीर बहा ना लोग ।
      पास नाश भय भव बने, विपदा सूखा भोग ।।

(7) बेटी बेटा सा लगे, नही करो तुम भेद।
      कन्या चलो बचाव करें, अकल थाल मत छेद।।

(8) बरफ जमी है यूँ जमी, ठिठुर गये सब अंग।
      कंबल टोप ले कर रखो, पहन ढ़ाक तन संग।।
 
        रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
       जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
  मो. - 9165720460,7770989795

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