Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 18/07/2011
इबारत भरी लब्ज
वाकिब आकर्षित लगी लगन ,
हर्षित तन - मन।
खाश आकांक्षा लिये
दिलों में मुकाम कायम ,
बड़प्पन की हक अर्ज
काबिज सम्मान स्वरुप मगन।
जन समाज मे ...
पत्थर भी पिघले
ऎसी लब्ज की तासीर में ,
पहचानी जाती महफिल भीड़ में
फितरत कर कोटिश नमन।
याद नाबूद बाद भी ...
अहं अल्फाज़ कर्कश
खलिश मन गमदीदा भरे ,
जेहन पर बद्दुआं तीखी निगाहें
चमन कुंठित जमीं गगन।
तस्लीम उन लहज को ,
निशब्द और स्तब्ध हूँ ...
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
Date : 18/07/2011
इबारत भरी लब्ज
वाकिब आकर्षित लगी लगन ,
हर्षित तन - मन।
खाश आकांक्षा लिये
दिलों में मुकाम कायम ,
बड़प्पन की हक अर्ज
काबिज सम्मान स्वरुप मगन।
जन समाज मे ...
पत्थर भी पिघले
ऎसी लब्ज की तासीर में ,
पहचानी जाती महफिल भीड़ में
फितरत कर कोटिश नमन।
याद नाबूद बाद भी ...
अहं अल्फाज़ कर्कश
खलिश मन गमदीदा भरे ,
जेहन पर बद्दुआं तीखी निगाहें
चमन कुंठित जमीं गगन।
तस्लीम उन लहज को ,
निशब्द और स्तब्ध हूँ ...
रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
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