Friday, 19 October 2018

* इबारत *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 18/07/2011
    इबारत भरी लब्ज
    वाकिब आकर्षित लगी लगन ,
    हर्षित तन - मन।
    खाश आकांक्षा लिये
    दिलों में मुकाम कायम ,
    बड़प्पन की हक अर्ज
    काबिज सम्मान स्वरुप मगन।
    जन समाज मे ...
    पत्थर भी पिघले
    ऎसी लब्ज की तासीर में ,
    पहचानी जाती महफिल भीड़ में
    फितरत कर कोटिश नमन। 
    याद नाबूद बाद भी ...
    अहं अल्फाज़ कर्कश
    खलिश मन गमदीदा भरे ,
    जेहन पर बद्दुआं तीखी निगाहें
    चमन कुंठित जमीं गगन।
    तस्लीम उन लहज को ,
    निशब्द और स्तब्ध हूँ ...

         रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
         जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
    


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