Saturday, 13 October 2018

* रूख महबूब की *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 13/05/2014

   फैली मेरे महबूब की महक
   चंदन सी पवन उड़े,
   बिखरी जिससे हीरे की किरणें
   रजत की - सी उजली बदन।
   रेशमी जुल्फें ललाट पर लट
   वादी में उठे चाहत की ललक,
   जहाँ तरुणाई सजी कली से
   गुंजते चंहूँ ओर पायल की झनक।

   रोमांचित करती हर दृश्य
   कोमल अधरों की लाली,
   श्रृंगार करे नव रत्न जड़ित
   मधुरस मुख मधुर वाणी।
   गर्म साँसें भीनी-भीनी सौंधी
   हिरनी सी चंचलता शर्मीली,
   चुनरी पीछे झाँक रही नयन
   बसी! हृदय तल मेरी दिलवाली।

   पद चिन्ह से नख-शिखा तक
   प्रेम रंग की गुंजार लय,
   अंग-अंग में अद्भूत निखार
   भू-अंबर योग तड़ित चमक।
   प्रीत संग ली वचन बसंती
   नश-नश तरंग सनम की,
   मिलन सुकून पल हों सफल
   एकात्म बन सहे कई कसक।

        स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
          सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
          मोब. 9165720460
                  9399169503
       

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