Thursday, 11 October 2018

* भजन *

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date :- 05/08/2013
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तेरी कंचन है काया अनमोल रे।ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।
ना तो तू गठरी का माया तोल रे।ss
अब तो हरि का नमन कर भोर ले।

एक बनाये पिंजरा, धड़कन के वास्ते।
दूसरे चुना है तुने, जीवन के रास्ते।
उड़ के अंधेरा करना ss 2
आस साँस छोड़ रे ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

नर तन पाये तुने, औरों तो पता नही।
अपना बना है डेरा, दूसरे बसा कहीं।
नइयाँ तो पार लगा ले ss2
कपट की घूँघट खोल रे।
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

कहते हो मेरा मेरा, कुछ नही पाओगे।
क्या लेकर आये जग में, क्या लेके जाओगे।
आना जाना सिर्फ अकेला ss2
दुनिया पड़ी है गोल रे ss
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

तेरी कंचन है काया अनमोल रे।
अब तो हरि का भजन चल बोल रे।

       स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
           सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
 

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