Friday, 29 July 2016

* कल्पत आँसू *

Created by -Teras Kaiwartya (Aansu)
Date -13/10/2014
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गुइया बछरे -बछर ल, जीये हन साथ म।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

दुनिया के रीत हावय , आना अऊ जाना ओ।
मया पिरीत जतन के , जिनगी बिताना ओ।
आँसू झिन बोहाबे रे संगी ,अपन आँखी म।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

सुरता के डोरी बँधा के , गुनत झिन रइबे ओ।
मने मन मा मोला झूला के , मया मोर भुलइबे ओ।
पथरा बनाले रे संगी , तय अपन छाती ल।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

किरिया खाये रहे जोही , संगे जीबो मरबो ओ।
आनी -बानी सपना दिखा , कहे नइ बिछरबो ओ।
मुरछ देबे का रे संगी , मँय लगाहूं फाँसी ल।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

आँसू -आँसू तय मोर आँसू , मय तोर आँसू ओ।
जियत भर लुकाय लेबे , करेजा के पाछू ओ।
दीया तँय बने रे संगी , मँय हावंव बाती न।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

गुइया बछरे -बछर ल , जीये हन साथ म।
अब निकलथे जिवंरा , तन जाही माटी म।

      स्वरचित - तेरस कैवर्त्य (आँसू )
          सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      
           


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