हमन निचट गंवईहा, हावन संगी बढ़िया ।
बनी भूति के करईया, हरन छत्तीसगढ़ीया।।
गंवइ गांव के बसोईया, छत्तीसगढ़ी के बोलइया।
दूसर भाखा आये नई, हमर गोठ सुघ्घर भइया।
घाम-घरी म रही-रही, हमर भेस होगय करिया।
हमन निचट गंवईहा, हावन संगी बढ़िया।
बनी भूति के करईया, हरन छत्तीसगढ़ीया।
बड़े बिहनिया उठके, जाथन तरिया नरवा।
लसून मिरचा चटनी संग, खाथन ग पनपुरवा।
का कइबे मिठास येकर, लगथे जब अषड़हा।
हमन निचट गंवईहा, हावन संगी बढ़िया।
बनी भूति के करईया, हरन छत्तीसगढ़ीया।
अब्बड़ सिधवा भइ, पेज पसिया के पियोइया।
नई जानन लन लबारी, छत्तीसगढ़ के रहोइया।
पथरा ढ़ेला के बोहइया, गढ्ढा माटी के खनोइया।
हमन निचट गंवइहा, हावन संगी बढ़िया।
बनी भुति के करइया, हरन छत्तीसगढ़िया।
नइये हयर लेंटर महल, झाला झोपरी के सुतोइया।
चितवा बघवा के डेरा, डोंगरी पहाड़ के रेंगोइया।
नईये अऊ गोड़ म पनही, काँटा खूंटी के गड़ोइया।
हमन निचट गंवईहा, हावन संगी बढ़िया।
बनी भूति के करईया, हरन छत्तीसगढ़िया।
तेंदू चार कोवा मउहा, पुरखा के बिनोइया।
येही डोंगरी झारी हमर, गुजर के चलोइया।
जय जोहार "आंसू " संग, हमर जिनगी के गढ़ोइया।
हमन निचट गंवईहा, हावन सबले बढ़िया।
बनी भूति के कमईया, हरन छत्तीसगढ़िया।
स्वरचित- तेरस कैवर्त्य (आंसू )
ग्राम- सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
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