Sunday, 14 August 2016

** राखी **

Created by- Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 15/07/2014   " राखी "
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राखी राखही बहिनी के समाज ल।
राखी राखही बहिनी के लाज ल।

     जियत मरत ले रिश्ता बने हे,
     भई - बहिनी के एके अंगना म।
     रक्छा करे बर बचन बंधाये,
     ये रेशम डोरी के बंधना म।

राखी राखही लछमी के रिवाज ल।
राखी राखही बहिनी के लाज ल।

     सुघ्घर थारी सजाके आथे बहिनी,
     बाँधय कलई म भई ल मया राखी।
     टीका लगाय माथे संग खावै मिठई,
     पांव लागी करके भई के आरती ।

राखी राखही बहिनी के लाग ल।
राखी राखही बहिनी के लाज ल।

     नई छुटय मया भई - बहिनी के,
     कतको दुरिहा ल दउड़ के आथे।
     निचट बिपत परे म तको बहिनी,
     राखी डाक पार्सल म भेजाथे।

राखी राखही बहिनी के अवाज ल।
राखी राखही बहिनी के लाज ल।

     करतब होथे भई के करे बहिनी ल सुरता,
     बच्छर दिन म आथे पवितरा तिहार ग।
     झिन भूलाहूं भईया ये राखी के रिश्ता,
     "आँसू " के कलम करय सबके जोहार ग।


                       तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                     सोनाडुला (बिलाईगढ़)
                   मोबाइल -9165720460

Wednesday, 10 August 2016

* प्रेम दमन *

Created by - TERAS KAIWARTY (AANSU)
Date - 13/10/2015, •Prem Daman•
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यादें जिंदगी भर को मुझे गमी बना दिया।
किसी की बेवफ़ाई ने मुझे कवि बना दिया।

सहज ही नहीं लिख सकता था ऐसा अल्फाज।
चल पड़ी मेरी लेखनी गिरते जुदाई की गाज।

ऐसा मंजर ढ़ाया चमन पर तूफान आकर।
मेरे महकते वादी पर गिरे भूचाल आकर।

हँसती खिलती फूल में खुश्बू पास न आया।
मेरा सच्चा प्यार किसी को रास न आया।

चंद पल में सजाये मन मंदिर बर्बाद हो गया।
खुशी की सपना संजोये दाग-दाग हो गया ।

मेरे दिल पर बन गया था ओ महलताज।
शाहजहाँ रहा मैं वह थी मेरी मुमताज।

अब भी उस मुरत की दिल से पूजा करता हूँ।
गुंजते आवाज कानों में आसपास ढूढ़ा करता हूँ।

एक जनम तो क्या प्यार कभी नहीं मिटेगा।
सात जनम तो क्या जन्मों तक नहीं टुटेगा।

बस ! प्यार की रुसवाई मेरे कफ़न में जायेगी।
"आँसू " की सिसकियाँ सदा दफन हो जायेगी।

                           तेरस कैवर्त्य (आँसू )
                         सोनाडुला (बिलाईगढ़)
                      मोबाइल - 9165720460

Thursday, 4 August 2016

* पल बीत जाती है *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 03/11/2013
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कल को आज से, आज को अभी से,
काम कर अपना , भविष्य बनाने को।
क्योंकि पल बीत जाती है, 
ना करो कुछ बहाने को।

     कर्म प्रधान है मान ले बन्दे ,
     करते जाओ सब लम्बे-लम्बे।
     फल की चिन्ता ना तु करना ,
     संकट से फिर ना तु डरना ।
खोना पड़ता है , रोना पड़ता है।
जीवन में कुछ पाने को , 
क्योंकि पल बीत जाती है ,
ना करो कुछ बहाने को।

     हिम्मत से खरे उतरना ,
     वादे से फिर नही मुकरना।
     जाना है तुम्हें उस मंजिल पर ,
     साँस लगा दें बस काबिल पर।
दम हैं तुझमे , कम ना किसी से।
कर दो नाम जमाने को ,
क्योंकि पल बीत जाती है ,
ना करो कुछ बहाने को।

           तेरस कैवर्त्य (आँसू )
         सोनाडुला (बिलाईगढ़)
         मो. - 9165720460


* कल्पना "आँसू " की *

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/06/1995 "कल्पना "
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आप अत्यंत आकर्षक हो।
आप में आकर्षण हैं।
आप से आकर्षित हूँ।
आसमान की घटा है ,
तेरी रेशमी जुल्फें।
धरती की छटा है ,
तेरी मिलकती पलकें।
हरी मदमाती यौवन से ,
ओस की कण भी छलके।
आँखें हैं झील सी तेरी ,
भौंह में लकीर की घेरी।
मुख मण्डल की कोमलता ,
होंठ गुलाब की फूल है।
मुस्कान उसकी पंखुड़ी ,
निगाहें बड़ी सुकून है।
सुरत तेरी चाँद है ,
बिंदिया सूरज की लाली।
साँसें सुहानी खुश्बू से ,
भरी बहती पुरवाई है।
सुराहीदार गर्दन तेरी ,
बाँहें शक्त ओर तेज है।
लचकती पतली कमर ,
बुलबुल की चंचल चाल है।
दो गोल कलाईयां ,
सोने पे सुहागा है।
सुडौल जंघा आग सी ,
दहकती अंगारे है।
रोम तेरी वह सावन की ,
हरियाली दुब है।
गदराई उभे संतरे ,
धड़कन को छुने लगी है।
पायल की झंकार तेरी ,
कुदरत को भ्रमित कर दी है
तुम्हें बनाने वाले ने ,
तरासी होगी बड़ी फुरसत से।
परी मेनका और उर्वशी को भी मात कर दी ,
वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका...

               तेरस कैवर्त्य (आँसू )
             सोनाडुला (बिलाईगढ़)
               मो.-9165720460


Wednesday, 3 August 2016

" ये मेरे वतन के साथियों "

Created by -Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 15/08/2000
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ये मेरे साथियों, ये मेरे भारतीयों।
इस मिट्टी को शत-शत नमन कर लो।
जरा सोच के, हौसला बुलंद कर लो।

अपना,अपना ही होता है, हर सब के लिए।
जान देना सीखो तुम, वतन के लिए।
निर्भय से संकट को,
देश द्रोही कलंक को दमन कर दो।
जरा सोच के, हौसला बुलंद कर लो।

दुश्मन अपने ही, मुल्क में डेरा करे।
जागो पहले तुम, जब ओ अंधेरा करे।
ना हटो तुम पीछे,
ना डरो खून छीटें, उसे खतम कर दो।
जरा सोच के, हौसला बुलंद कर लो।

कब तक सहते रहोगे, उनके जुल्में सितम।
बाँध के दौड़ो सिर पे, सब तुम भी कफन।
ना डरें बुढ़े बच्चे,
ना हिले पेड़ पत्ते, तन अर्पण कर दो।
जरा सोच के, हौसला बुलंद कर लो।

ये मेरे साथियों, ये मेरे भारतीयों।
इस मिट्टी को, शत-शत नमन कर लो।
जरा सोच के, हौसला बुलंद कर लो।

             तेरस कैवर्त्य (आँसू )
            सोनाडुला (बिलाईगढ़)
      जिला - बलौदाबाजार-भा.पा.(छ.ग.)
           मोबाइल - 9165720460




* आँसू का अल्फाज *

Created by -Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 20/12/2013,  (आँसू की अल्फाज )
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अनुपम अभिजात अध्यापक आकर्षण आधार है।
अमृत अक्षर अनेक आदर्श आचार है।
अति अथक अभय आशय आकार है।
अलग अकथ अभिप्राय आदि आवाज है।
अब अवलि अगम आदरणीय आदाब है।
अगर अधर अचेत आज आंकलन आप है।
अंग - अंग अंगड़ाई ओझल अंबर आश है।
आरजू अंदर अमर अचल आँसू अल्फाज है।

          तेरस कैवर्त्य (आँसू )
       सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
      मोबाइल - 9165720460

** मुस्कान **

Created - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 02/02/2002  * MUSKAN *
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मुस्कान एक कला है।
मुस्कान एक अदा है।
मुस्कान से जन्नत फिदा है।
मुस्कान गजब अनोखा है।
मुस्कान चेहरे की शोभा है।
मुस्कान मुख की चमक है।
मुस्कान खुशी की झलक है।
मुस्कान कुदरत की देन है।
मुस्कान चाहत भरी प्रेम है।
मुस्कान सुख की आशा है।
मुस्कान प्रेम की भाषा है।
मुस्कान से छुपा राज है।
मुस्कान में कुछ खास है।

       तेरस कैवर्त्य (आँसू )
     सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
     मोबा .- 9165720460

Monday, 1 August 2016

* बहते आँसू *

Created By - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/10/2015
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करुण फलक पे गिले आँसू ,
पलक झपकते गिरे आँसू ।

          पीड़ा बयाँ कर नीर नमकीन ,
          रुदन स्वरमय ली गमगीन ।
          ईश धरा पर अनन्य दीन , 
          माँ या धन भार्या में लीन।।

राज संगम पर मिले आँसू ,
दु:ख अर्ध जब धूले आँसू ।

          सहज ही क्यूं बहते नयन से ,
          अपनों की जब हो गमन से।
          दो बूँद की संबंध जनम से ,
          लाल जोड़े या श्वेत कफन से।।

घुटन सह अब पीले आँसू  ,
सिसकियां तक हिले आँसू ।

          स्मरण सदा करो जन प्यारे ,
          कर चलें फ़िदा हमें बे सहारे।
          कामना फिर आना मध्य हमारे ,
          नाम अमर कर लें जयकारे।।

स्मृति चिता संवार किये आँसू ,
विदा कर बहते अब दिये आँसू ।

                तेरस कैवर्त्य (आँसू )
              सोनाडुला , (बिलाईगढ़ )
              मोबा.- 9165720460


** कलम की धार **

Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 01/01/2016
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ये कलम की धार आभार लिखती है ।
दयानिधि गुरुओं को प्रणाम लिखती है।
     मीरा ,राधा से श्याम तक ,
     हीर - राँझा से शिरी - फरहाद तक ,
प्राचीन से वर्तमान तक , यह प्यार दिखता है ,
ये कलम की धार दीदार लिखती है।
     अर्जून, से औरंगजेब तक ,
     कुरुक्षेत्र से चित्तौड़ तक ,
रजनी से प्रभात तक , इतिहास लिखती है।
ये कलम की धार क्या - क्या बात लिखती है।
     बेबस लाचार अमीरों का , 
     साधु - संत फकीरों का ,
विद्या दाता, कवियों का , हाव -भाव लिखती है।
ये कलम की धार हाल - चाल लिखती है।
     नभ जमी सर्व अवतार का ,
     सात समुन्दर पार का ,
नमी हवा अंगार का , आकार खिंचती है।
ये कलम की धार पहचान लिखती है।

प्रथम स्थान गुरु का, स्वयं भगवान लिखते है।
ये कलम की धार वाह - वाह लिखती है।
ये कलम की धार बार - बार लिखती है।

             तेरस कैवर्त्य (आँसू  )
           सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
        जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460,7770989795