Created by - Teras Kaiwartya (Aansu)
Date - 05/06/1995 "कल्पना "
***********************************
आप अत्यंत आकर्षक हो।
आप में आकर्षण हैं।
आप से आकर्षित हूँ।
आसमान की घटा है ,
तेरी रेशमी जुल्फें।
धरती की छटा है ,
तेरी मिलकती पलकें।
हरी मदमाती यौवन से ,
ओस की कण भी छलके।
आँखें हैं झील सी तेरी ,
भौंह में लकीर की घेरी।
मुख मण्डल की कोमलता ,
होंठ गुलाब की फूल है।
मुस्कान उसकी पंखुड़ी ,
निगाहें बड़ी सुकून है।
सुरत तेरी चाँद है ,
बिंदिया सूरज की लाली।
साँसें सुहानी खुश्बू से ,
भरी बहती पुरवाई है।
सुराहीदार गर्दन तेरी ,
बाँहें शक्त ओर तेज है।
लचकती पतली कमर ,
बुलबुल की चंचल चाल है।
दो गोल कलाईयां ,
सोने पे सुहागा है।
सुडौल जंघा आग सी ,
दहकती अंगारे है।
रोम तेरी वह सावन की ,
हरियाली दुब है।
गदराई उभे संतरे ,
धड़कन को छुने लगी है।
पायल की झंकार तेरी ,
कुदरत को भ्रमित कर दी है
तुम्हें बनाने वाले ने ,
तरासी होगी बड़ी फुरसत से।
परी मेनका और उर्वशी को भी मात कर दी ,
वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका...
तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
मो.-9165720460
Date - 05/06/1995 "कल्पना "
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आप अत्यंत आकर्षक हो।
आप में आकर्षण हैं।
आप से आकर्षित हूँ।
आसमान की घटा है ,
तेरी रेशमी जुल्फें।
धरती की छटा है ,
तेरी मिलकती पलकें।
हरी मदमाती यौवन से ,
ओस की कण भी छलके।
आँखें हैं झील सी तेरी ,
भौंह में लकीर की घेरी।
मुख मण्डल की कोमलता ,
होंठ गुलाब की फूल है।
मुस्कान उसकी पंखुड़ी ,
निगाहें बड़ी सुकून है।
सुरत तेरी चाँद है ,
बिंदिया सूरज की लाली।
साँसें सुहानी खुश्बू से ,
भरी बहती पुरवाई है।
सुराहीदार गर्दन तेरी ,
बाँहें शक्त ओर तेज है।
लचकती पतली कमर ,
बुलबुल की चंचल चाल है।
दो गोल कलाईयां ,
सोने पे सुहागा है।
सुडौल जंघा आग सी ,
दहकती अंगारे है।
रोम तेरी वह सावन की ,
हरियाली दुब है।
गदराई उभे संतरे ,
धड़कन को छुने लगी है।
पायल की झंकार तेरी ,
कुदरत को भ्रमित कर दी है
तुम्हें बनाने वाले ने ,
तरासी होगी बड़ी फुरसत से।
परी मेनका और उर्वशी को भी मात कर दी ,
वाह ! मेरी कल्पना हुस्न की मलिका...
तेरस कैवर्त्य (आँसू )
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
मो.-9165720460
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