Monday, 9 December 2019

सोनहा माटी के वीर लाल

मोर छत्तीसगढ़ सिरजे हय, भारत देश के छाती म।
रामसाय के वीर नारायण, जोहार सोनहा माटी ल।

सतरा सौ पन्चानबे म करे, जनम लेके चिन्हारी ग।
घोड़ा चढ़ खेलय दउड़य, तलवार संग चिंयारी ग।
कटकटात मंध डोंगरी म, कुर्रुपाट दुवार बसय।
सब्बो बिंझवार जाति, कुपाठ देव के पुजा करय।
1856 बेरा राज म पड़ीस, जबर दुखहा दुकाल ह।
माखन बनिया के अन्न बांटय, गरीब अउ किसान ल।

स्मिथ कुसवा बैरी जेल भेजे, वीर ल मान के चोर।
जेल तोड़ के भागिस वीर, होये नइ कोनो ल शोर।
पांच सौ सेना के संग अपन, बैरी ल धुर्रा चटवाय।
अपन ही देवरी के बहनोई, घर के भेदी लंका ढ़ाय।
1857 दस दिसम्बर रइपुर, चउक झूलय फांसी म।
राज के शान इमान जगाय, झूल गय हांसी हांसी म।

माटी पिरीतिया मनखे के, धर धर लहु आंसू बोहाये।
छत्तीसगढ़ महतारी के पहली, शहीद बेटा वीर कहाये।
बैरी मन बर वीर बघवा अउ, एरावत कस हाथी बनगे।
अंधरा अउ गरीब किसान के, डहर बताय लाठी बनगे।
जुग जुग बर सुरता के, तंय किताब अउ पाती बनगे।
सोनाखान वीर भुइयां के, अमर दीया के बाती बनगे।

स्वरचित :-
तेरस कैवर्त्य 'आंसू'
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)
916720460
email- aansukai4545@gmail.com




Monday, 2 December 2019

चलो गांव की ओर (दोहा)

शहर नगर में विष घुले, करे जोर की शोर।
शुद्ध हवा बहने लगी, चलो गांव की ओर।।

तेज गमन की होड़ में, उड़े बड़े ही धूल।
मुक्त रहो इस खेल से, बात नही तुम भूल।।

शांत छांव में मन मिले, कष्ट मिटे अति दूर।
हरा भरा तरु देखना, घूमें गांव जरूर।।

धान फसल की बालियां, लगते कनक समान।
अन्न उगाकर बांटते, देव स्वरूप किसान।।

गाय पहट पंछी उड़े, कई देख लो चाल।
कमल खिले जब रवि उगे, नदी और है ताल।।

नीर भरे सब नारियां, नाचे वन में मोर।
आम डाल कोयल कुके, चलो गांव की ओर।।

 तेरस कैवर्त्य "आंसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मोबाइल - 9165720460
email - aansukai4545@gmail.com


Tuesday, 22 October 2019

दीवाली त्यौहार (दोहा)


आया कार्तिक मास अब, साफ करें घर द्वार।
रंग बिरंगे लग रहे, आया है त्यौहार।।१।।

गली गली में धूम है, जलती दीप कतार।
सभी मनाये साथ में, दीवाली त्यौहार।।२।।

श्रद्धा सुमन चढ़ा करें, पूजे लक्ष्मी मान।
मेवा घर घर बांटते, नया पहन परिधान।।३।।

लौट आये हैं वन से, अवध राज के राम।
इसी खुशी में बन गये, घर गली चार धाम।।४।।

सुमत सहज ही बांध के, आये जब त्यौहार।
महक दहक बहती हवा, देख खुशी परिवार।।५।।

बैर भाव को छोड़ के, निज मन सुर कर गान।
दया धरम के राह चल, तभी मिलेगा मान।।६।।


स्वरचित - तेरस कैवर्त्य 'आंसू'
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)






Wednesday, 18 September 2019

सरल सुगम है अपनी भाषा

                    ।। चौपाई।।
अति सुन्दर मन लगे सुहानी। बोल लिखे इस लिपि में ज्ञानी।।
बहुत वर्ण स्वर हिन्दी माला। हिन्द देश अरमान निराला।।१।।

सरल सुगम है अपनी भाषा। फिर क्यों अन्य करें अभिलाषा।।
दुल्हन जैसी खूब सजे हैं। अलंकार रस छंद बजे हैं।।२।।

कवि लेखक साहित्य रचाते। मन को खोल विचार दिखाते।।
हिन्दी रचना सुन्दर गाना। गागर में सागर छलकाना।।३।।

भारत ऊंचा नभ संसारी। मानक भाषा लाज हमारी।।
हिन्दी कभी भूल नहि जाना। मुख मंडल में इसे सजाना।।४।।

गजब रंग दुनिया में छाई। मन जीवन में प्रेम जगाई।।
झूमें गाएं सब नर-नारी। मेरी हिन्दी विपदा हारी।।५।।

रचना - तेरस कैवर्त्य 'आंसू '
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. - ९१६५७२०४६०, ९३९९१६९५०३
email:aansukai4545@gmail.com

Thursday, 5 September 2019

चयनित हाइकु

1) वन में ठूंठ~
    कुल्हाड़ी की धार में
    बैठी चिड़िया।
2) झील में चांद
    प्रतीक आकाश की~
    जूगनू तारें।
3) पक्षी का झुंड~
    भूरी जमीन पर
    दाने व जाल।
4) केले के पत्ते
    चार कोने तरफ~
    अंतिम यात्री।
5) बच्चों की टोली
    संकरी द्वार पर~
    चौखाट गिरी।
6) नन्ही मछली
    बगुला की चोंच में~
    आखिरी सांस।
7) घर विरान~
     शाख में बन्दर व
     मधु की छत्ता।
8) प्रेमी-प्रेमिका
    सुनसान गली में~
    ठंड की रात।
9) बिहड़रण्य~
     फांसी पर लटके
     प्रेमी युगल।
10) धुआं आरंभ
       बाड़ा पास भठ्ठी में~
       बिल्ली के बच्चे।
11) पेड़ की छांव
       बीच चौराहे पर~
       लाल सलाख।




 रचना - तेरस कैवर्त्य 'आंसू '
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो.- 9165720460

Saturday, 6 July 2019

बरखा आइस

                             बरखा आइस

बरखा आइस बरखा आइस , सबके अंतस भाइस हे।
नइ दिखे चातर खेत खार , डारा पाना हरियाइस हे।

     किंदर किंदर के आइस बादर , ठरत गर्रा धूंका लाइस हे।
     झिमिर झिमिर पानी गिरय , भूइयां के पियास बूझाइस हे।

बैशाख जेठ के नौतप्पा म , रुख राई मूरझाय रहिस।
पान पतइ झर सूखाय ते , अब डोंगरी झारी हरियाइस।

     कोयली बोलय कुहू - कुहू , बने झक्कर ल बुलावत हे।
     पीहू - पीहू अब पपीहा कहिके , सब्बो ल सुनावत हे।

किसान बैला संग नागर जोतय , डोली खेत टिकरा खार म।
बारी बखरी म साग जगाय , रुख जगाय मेढ़ तरिया पार म।

     अषाढ़ सावन के बरखा करे , नरवा नदियां गहगहाये।
     कुवांर कार्तिक के जुढ़ात लगे , जाड़ छिन छिन समाये।

              रचना - तेरस कैवर्त्य *आंसू*
                 सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)
                     पिन - 493338
        मोबा. - 9165720460, 9399169503
   



Friday, 5 April 2019

मन ल मोहे चले आबे (करमा)


B - चले आबे चले आबे चले आबे ओ ss मोर रानी
      तार देहे मन ल मोहे चले आबे ओ, मन लगाके करमा नाचे आबे न
      तार देहे ....
G - चले आहूं चले आहूं चले आहूं गा ss मोर राजा
      तार देहे मन ल मोहे चले आहूं गा, मन लगाके करमा नाचे आहूं न
      तार देहे ....
      हाथ में संवरेगी तंय ह गोदना गोदाले।
      मांगे म सेंदुर गोड़ म माहुर रचाले।
      आरो मोर लेके गोरी,  झिन कोनो देखें 2
      कलेचुप तंय ह मोहिनी दौड़े आबे ओ मोर रानी
      तेरस लेवत डाहर जोहे आबे ओ
      तार देहे ....
   
      नरवा के तीरे सुग्घर चलथे पुरवाही।
      छम छम बजाके पैरी आबे मोर दीवानी।
      मन के डोरी खींचे बही, मया रस पीके 2
      बिहना संझाती कस खेले आबे ओ मोर रानी
      तार देहे ....

G - तंय मोर मयारु चल न करमा गड़ाहू।
      जनम जनम के तोला ज़िन्दगी बनाहूं।
      नजर दिन लागे बइहा, मया झिन छुटे 2
      भांवर किंजर के घर में तोरे आहूं ग मोर राजा
       तार देहे ...
B - चले आबे ...तार देहे ..
G - चले आहूं ...तार देहे ..
B - तार देहे मन ल मोहे चले आबे ओ
      मन लगाके करमा नाचे आबे न

G - तार देहे मन ल मोहे चले आहूं गा
      मन लगाके करमा नाचे आहूं न

     गीतकार - तेरस कैवर्त्य 'ऑसू'
     शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)
             

Sunday, 31 March 2019

सरहद के रखवाले


उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।

धन्य है वह माता पिता तुमको जन्म दिया है।
धन्य है वह पत्नी बेटा तुमको त्याग किया है।
सीमा पर खेले बंदूक खेल होली खून की गुलाले।
आंगन सुना कर .......

सीना पर अपने गोली बारुद ख़ाके वतन आबाद करते हो।
दुश्मन से भी लोहा लेकर अपने देश में सरताज करते हो।
इस मिट्टी मे मिटने चले फर्ज पर मेरे वीर मतवाले।
आंगन सुना कर .......

पुन्य आत्मा मेरे सैनिक बेटे नही भूलते आंचल में सिर झुकाने।
कसम है मां भारती की सरहद में शत्रु को लगाते मौत ठिकाने।
मिट जाते है परिवार छोड़ अमर बनें बड़े दिलवाले।
आंगन सुना कर .......

उन मां की पग चुमूं जो अपने लाल को किये वतन के हवाले।
आंगन सुना कर मां बापू भाई बहन से करें सरहद के रखवाले।

रचना - तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
मोबाइल - 9165720460




Monday, 25 March 2019

अपनापन (दोहा)

अपनापन (दोहा)
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जन तन में हो यह दया , सब में सम ही भाव।
संकट पर साथी बनें , भर दें उनके घाव।।
रक्षक होता है बड़ा , जीवन दे यमराज।
अपनापन रग रग जगा , गिरे किसी पर गाज।।
जलचर थलचर हर गती , सब में रमते जान।
दर्द मर्म सबको लगे , समझें सभी समान।।
दया रहम करते चले , पथ में भूखे दीन।
दान पुण्य करते रहो , परम धाम में लीन।।
दबे बीज उग नव तरू , चेतन कर संभाल।
अपनापन सुराग जगे , मानव सुन्दर चाल।।
 दौलत रहना कुछ नही , जैसे धनी वजीर।
जीने से मरना भला , जागे नही जमीर।।
मानव दानव मत बनो , रक्षा कर बन श्याम।
चीर हरण में आ बचा , नारी का सम्मान।।

तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक , सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो. - 9165720460




शहादत (कुंडलियां)

शहादत
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लाल जान है उसी का , भारती के जवान।
सदा मां की सेवा में , खूब चढ़ा परवान।।
खूब चढ़ा परवान , स्वयं को भी गये भूल।
आंसू भर के ऑख , शहीद तन गये कबूल।।
बदला हो खून की , नापाक होगी हरकत।
अमर रहें हर वीर , कोटि नमन है शहादत।।

तेरस कैवर्त्य (आंसू)
शिक्षक , सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मो. - 9165720460

Friday, 22 March 2019

प्रहरी


ढ़ाल बन लडे़ सीमा में , शत्रु से लोहा लेना है।
प्रहरी बैर की नींद उड़ाते, जो मेरे वीर सेना है।

घूस जाओ उनके जमी , चीर उनके सीने को।
राख करो ऐसे मुल्क को , निडर सीख जीने को।

रहम नहीं करना भारत , कटोरे वाले उस पाक को।
तिरंगा लहरा उनके वादी , नाज करो हिन्दुस्तान को।

सबक सीखा कर अभिनंदन , आतंकी पनाह देते है।
सदा झूठ छल कर कायर , सदियों से गुनाह करते है।

ऐसे जुल्म सितम हिंसक को , जड़ धड़ से पतन करो।
सारे जहां से अच्छा भारत , देश वीरता को नमन करो।

रचनाकार - तेरस कैवर्त्य (ऑसू)
शिक्षक, सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)



Thursday, 21 March 2019

शहीद जवान

मेरे वतन की सेना को, आंखें यू दिखाना नही।
निकाल देंगे आंखें तेरे, अब हाथ मिलाना नही।

अरे नापाक हैवान, छल से पीछे छुरा घोपते हो।
सामना कर ताकत है तो, क्यों झूठी पापड़ बेलते हो।

हमने चालीस वीर गंवाए, बदले तेरे हजार मारेंगे।
जीत सदा है भारत की, हिम्मत फिर नहीं हारेंगे।

बेहया क्रूर दुर्जन हत्यारे, अपने बाप को धमकाते हो।
हमने तुझे जनम दिया, गीदड़ सी रौब जमाते हो।

बहुत सहा है हमने, हद कर दी आतंक गद्दारों।
बूंद बूंद खून का हिसाब होगा, खाक होगें मक्कारों।

मां मेरी अब विकराल, काली चंडी रूप दिखाएगी।
असुरो का गला काट, बदले की प्यास बुझाएगी।

देश खातिर परिवार छोड़े, फर्ज पर हुए बलिदान।
अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, मेरे शहीद वीर जवान।

तेरस कैवर्त्य (आंसू) शिक्षक
सोनाडूला, जिला - बलोदाबाजार (छ ग)

Wednesday, 13 February 2019

बसंत बहार (चौपाई)

                            बसंत बहार (चौपाई)

माघ मास बसंत ले आये। महक दहक के अति मन भाये।।
मंद गंध बह गगन समीरा। मिट थकान कर शांत शरीरा।।1।।

कोकिल वन में राग सुनाये। भ्रमर मधु की कलश बनाये।।
आम्र मंजरी कनक समाना। वीणा वंदन सब जग माना।।2।।

महुआ सुमन रजत सी सोहे। लाल पलास रंग मन मोहे।।
पीला सरस चुनर भू डेरा। खग चहके जब होत सबेरा।।3।।

चाँदनी रात धरा बिछाई। जल मे झांक रहे परछाई।।
मनहर दृश्य स्वर्ग बन जाये। रवि किरण खूब फूल खिलाये।।4।।

आय बसंत गजब ऋतुराजा। सज दुल्हन सी बाजे बाजा।।
मस्त मगन सभी झुमे नाचे। वृक्ष लता घर खेत के ढ़ाचे।।5।।

धूम मची रंगो की होली। गाल गुलाल रंगते चोली।।
बैर भाव बंधु भूल जाओ। प्रीत मिलन की दीप जलाओ।।6।।


           तेरस कैवर्त्य (आँसू)
         सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
 जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)

Tuesday, 15 January 2019

झिन रोबे बाई मोर

Created : Teras Kaiwartya (Aansu)
Date : 14/01/2016
झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे बाई मोर।
रात दिन गुनत तंय ह झिन रोबे न।

अकेला ही जाहूँ , कोनो नइ जावय संग म।
झुलत रही मुहरन , तोर नजरे नजर म।
भुइयां म आके , झिन जियव घमंड म।
काँटा खूँटी झिन गड़व, जिन्गी डहर म।
राख हो जाही ये माटी म काया -2
पिरित के बिरवां ल बोंबे न।
झिन रोबे बाई मोर .....

लइका ल बने तंय , पढ़ा अउ लिखा के।
ओमन के जिन्गी ल , उज्जर बनाबे।
नान्हे बड़कू रिश्ता , मान सीखा के।
सुग्घर सिरजा के , भल मनखे बनाबे।
हिम्मत करबे आँसू ल पोछ के -2
गरु के गठरी ल बोहले न।
झिन रोबे दाई मोर .....

छत्तीसगढ़ माटी के , मंय तेरस हंव बेटा।
धनहा डोली हावै , मोर सोन के डोला।
तहूं बाप बनबे , मोर दुलरवा तंय बेटा।
लबारी छोड़ ईमानदारी , बताबे सबो ला।
आवा गमन दुनिया के रिवाज हे -2
मोला खांध म तंय ढ़ोबे न।

झिन रोबे बाई मोर झिन रोबे दाई मोर।
रात दिन गुनत तंय ह झिन रोबे न।
झिन रोबे भाई मोर झिन रोबे बेटा मोर।
झिन रोबे बहिनी मोर झिन रोबे दीदी मोर।
रात दिन गुनत गुनत झिन रोबे न।

            रचना - तेरस कैवर्त्य (आँसू)
               सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
     जिला - बलौदाबाजार - भाटापारा (छ. ग.)
             मोबा. - 9165720460
email:aansukai4545@gmail.com