नही किसी से कर गिला, करो सभी से प्यार।
मुख तुक से मन तन खिले, मुख ही बने कटार।।1।।
भेक कूप के सोचता, यही मेरा घर द्वार।
कूप निकल के देख तो, बहुत बड़ा संसार।।2।।
तीन देव से बच सदा, पवन नीर तम आग।
जरा चूक से तन मिटा, जीव जगत उठ जाग।।3।।
लगातार करते रहें, निश दिन अपना काम।
कमल नयन जब खिल उठे, मिले सुखद परिणाम।।4।।
दीन हीन को मत हँसो, समय बड़ा बलवान।
आज किसी का धन रहा, कल धन पर के मान।।5।।
हार हटा मन से सदा, मन को मन से जीत।
जैसा सोचे मन बने, यही जगत की रीत।।6।।
करो मनुज दिन की शुरू, बोलो मुख से राम।
मन के मैले धो हटा, फिर कर निज शुभ काम।।7।।
जीवन गढ़ता है सही, नही समझ तुम गैर।
गुरू चिकित्सक पाल से नही करो विष बैर।।8।।
चार दिनों की जिंदगी, मत कर जन अभिमान।
सबसे मिल के रह सदा, जब तक तन में जान।।9।।
मन चंगा तो साथ है, तन में गंगा वास।
संशय मन से पल हटा, कहते तेरस दास।।10।।
तेरस कैवर्त्य "आँसू"
सोनाडुला (बिलाईगढ़)
जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
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