Friday, 9 October 2020

रोला छंद (बाबुल)

                  (1)

मेरा बाबुल रोज, गोद ले लोरी गाता।

मीठे - मीठे बोल, कहानी खूब सुनाता।

पूरा कर अरमान, ज्ञान की बगिया बोंंये।

करके कन्या दान, नयन से नीर भिगोये।

                  (2)

बाबुल प्यारे आप, मुझे लिख पढ़ा सिखाया।

बड़े प्रेम के साथ, चाँद सी रूप सजाया।

लगी एक मैं बेल, बाग की आँगन तेरा।

सुना सुना कर मेल, पिया घर संग सबेरा।



तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)



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