Friday, 9 October 2020

दोहा (केंवट)

वीर बिलासा दायनी,  हम हैं तेरे अंश।

नाम अमर तेरा रहे, मधुर गुणी हो वंश।।1।।


केंवट दिन भर तर रहे, खेप नाँव पतवार।

सरयू पावन की नदी, कर जीवन संचार।।2।।


पालन पोषण मे सहे, धूप छाँव बौछार।

मीन जाल मे चुन फँसा, जीये लघु परिवार।।3।।


जादू टोना राम के, नारी हुआ यदि नाँव।

रोजी रोटी नहिंं चले, दु:ख की होगी घाव।।4।।


नारी शिला सोच बने, धो पग काठ पखार।

बड़े भाग केंवट गुहा, किये नदी जल पार।।5।।


भगवन मानव रूप मेंं, आये केंवट द्वार।

दर्शन पाकर धन्य है, सारे कुल को तार।।6।।


तेरस कैवर्त्य "आँसू"

सोनाडुला (बिलाईगढ़)

जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)


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